ईरान-यूएस तनाव और कच्चे तेल में उछाल का सीधा असर, 94.90 तक पहुंचा रुपया
नई दिल्ली।इंडिया की अर्थव्यवस्था पर अंतरराष्ट्रीय तनाव का असर साफ दिखाई देने लगा है। सोमवार को शुरुआती कारोबार में भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारी गिरावट के साथ खुला। रुपया 139 पैसे टूटकर 94.90 प्रति डॉलर तक पहुंच गया, जिससे वित्तीय बाजारों और आयात क्षेत्र में चिंता बढ़ गई है।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार इस बड़ी गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव माना जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा ईरान के जवाब को खारिज किए जाने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में अचानक तेज उछाल देखने को मिला। इसका सीधा असर भारतीय मुद्रा पर पड़ा।
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। ऐसे में जैसे ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होता है, डॉलर की मांग बढ़ जाती है और रुपया दबाव में आ जाता है। सोमवार को भी यही स्थिति देखने को मिली।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ता है तो आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल, परिवहन और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर भी असर दिखाई दे सकता है। रुपये की कमजोरी का मतलब आयात महंगा होना है, जिसका असर आम जनता की जेब तक पहुंच सकता है।
शेयर बाजार में भी शुरुआती कारोबार के दौरान दबाव का माहौल देखा गया। विदेशी निवेशकों की सतर्कता और वैश्विक अनिश्चितता के कारण निवेशक सुरक्षित विकल्पों की ओर बढ़ते दिखाई दिए।
आर्थिक जानकारों का कहना है कि भारतीय रिजर्व बैंक स्थिति पर नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर बाजार में हस्तक्षेप भी किया जा सकता है। हालांकि लगातार गिरता रुपया सरकार के लिए भी चिंता का विषय बनता जा रहा है।
विश्लेषकों के मुताबिक यदि कच्चे तेल की कीमतों में तेजी जारी रही और वैश्विक तनाव कम नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में महंगाई पर अतिरिक्त दबाव बन सकता है। इसका असर सीधे आम आदमी, उद्योग और व्यापार पर पड़ने की आशंका है।


