– तीन लाख रुपये की मशीन में स्वास्थ्य जांच की कई सुविधाएं, बीपी, शुगर, ईसीजी समेत कई जांचों का दावा; स्टार्टअप को ‘स्टार्ट इन यूपी’ से मिली मदद
लखनऊ। ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो मार्ट में आयोजित यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो-2026 में स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ी एक तकनीकी पहल ने लोगों का ध्यान खींचा। यहां प्रदर्शित ‘डॉक्टर ऑन ड्यूटी’ मशीन के बारे में बताया गया कि यह एक बूंद खून के नमूने से करीब 10 मिनट में 75 से अधिक प्रकार की जांच करने में सक्षम है।
बताया गया कि करीब तीन लाख रुपये की इस मशीन में कई स्वास्थ्य जांच सुविधाओं को एक साथ उपलब्ध कराने की कोशिश की गई है। मशीन के जरिए ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर, ECG, फेफड़ों की कार्यक्षमता और आंख-कान से संबंधित जांच जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने का दावा किया गया है।
इस तकनीक की खासियत यह बताई जा रही है कि इसे ऐसे स्थानों पर भी उपयोग करने की परिकल्पना है, जहां बड़े अस्पताल या अत्याधुनिक जांच सुविधाएं आसानी से उपलब्ध नहीं हैं। मशीन को एक तरह के कॉम्पैक्ट हेल्थ चेकअप सेंटर के रूप में विकसित करने का प्रयास किया गया है।
ट्रेड शो में प्रदर्शित इस मॉडल के जरिए स्वास्थ्य जांच को अधिक सुलभ और कम समय में उपलब्ध कराने की संभावनाएं दिखाई गईं। हालांकि, मशीन से होने वाली प्रत्येक जांच की चिकित्सकीय उपयोगिता और सटीकता को संबंधित नियामकीय एवं चिकित्सा मानकों के अनुरूप प्रमाणित किया जाना जरूरी है।
‘डॉक्टर ऑन ड्यूटी’ मॉडल को स्वास्थ्य क्षेत्र में स्वरोजगार और छोटे स्तर पर डायग्नोस्टिक सेवाओं के अवसर से भी जोड़कर देखा जा रहा है। ‘स्टार्ट इन यूपी’ के तहत स्टार्टअप को 10 लाख रुपये की सहायता मिलने की जानकारी भी सामने आई है।
उत्तर प्रदेश सरकार की स्टार्टअप नीति के तहत प्रदेश में मेडटेक और स्वास्थ्य तकनीक से जुड़े नवाचारों को बढ़ावा देने के लिए लखनऊ में मेडटेक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस भी संचालित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य चिकित्सा उपकरण, इलेक्ट्रॉनिक्स और हेल्थ इंफॉर्मेटिक्स क्षेत्र के स्टार्टअप को तकनीकी एवं अन्य सहयोग उपलब्ध कराना है।
25 से 29 सितंबर तक आयोजित यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में स्वास्थ्य, इलेक्ट्रॉनिक्स, स्टार्टअप, एमएसएमई समेत कई क्षेत्रों के उत्पाद और तकनीक प्रदर्शित किए जा रहे हैं। इस वर्ष शो में 2,400 से अधिक प्रदर्शकों और बड़ी संख्या में घरेलू एवं विदेशी खरीदारों की भागीदारी रही है।
‘डॉक्टर ऑन ड्यूटी’ जैसी तकनीकें यह संकेत देती हैं कि स्वास्थ्य सेवाओं में पोर्टेबल और डिजिटल तकनीक की भूमिका बढ़ रही है। हालांकि, इसका वास्तविक प्रभाव व्यापक उपयोग, चिकित्सकीय सत्यापन, लागत और ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंच पर निर्भर करेगा।


