लखनऊ: उत्तर प्रदेश के सामाजिक कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण (Aseem Arun) ने मंगलवार को कहा कि वर्तमान समय में डिजिटल शिक्षा (Digital education) एक आवश्यकता बन गई है, विकल्प नहीं। प्रौद्योगिकी के माध्यम से छात्राओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, नई जानकारी तक पहुंच और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में सहायता मिलेगी। उन्होंने कहा कि यह प्रयास छात्राओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे वे आत्मविश्वास से भरपूर और आत्मनिर्भर बनेंगी।
सामाजिक कल्याण विभाग ने छात्राओं को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने और शिक्षा के माध्यम से आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक नई पहल शुरू की है। इस संबंध में मंगलवार को गोमती नगर स्थित भागीदारी भवन में एक समन्वय बैठक और टैबलेट वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के दौरान सामाजिक कल्याण विभाग और मदद फाउंडेशन के बीच एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए।
इस कार्यक्रम के तहत, गोरखपुर और महाराजगंज स्थित जय प्रकाश नारायण सर्वोदय बालिका विद्यालय के प्रधानाचार्यों को कुल 40 टैबलेट सौंपे गए। प्रत्येक विद्यालय को 20 टैबलेट मिले हैं ताकि विद्यार्थी इनका उपयोग अध्ययन, डिजिटल शिक्षा और अन्य शैक्षिक गतिविधियों के लिए कर सकें। यह पहल एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू की गई है और इसकी सफलता के बाद, अन्य जिलों के विद्यालयों को भी टैबलेट उपलब्ध कराने की योजना है।
मदद फाउंडेशन के संस्थापक राजेश मणि ने कहा कि समाज कल्याण विभाग के साथ यह साझेदारी शिक्षा और सामाजिक उत्थान के क्षेत्र में एक सार्थक पहल है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रयास से छात्राओं में तकनीकी कौशल विकसित होगा और वे डिजिटल दुनिया के साथ कदम मिलाकर चलने में सक्षम होंगी। समाज कल्याण विभाग के निदेशक संजीव सिंह, उप निदेशक आनंद कुमार सिंह, जे. राम, अन्य विभागीय अधिकारी और मदद फाउंडेशन की टीम भी कार्यक्रम में उपस्थित थी।


