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Friday, July 3, 2026

हलाला की आड़ में अपराध बर्दाश्त नहीं : हाईकोर्ट

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नाबालिग से दुष्कर्म मामले में एफआईआर रद्द करने से इनकार

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हलाला और तीन तलाक से जुड़े एक गंभीर मामले में सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि किसी भी धार्मिक परंपरा या व्यक्तिगत कानून की आड़ में आपराधिक कृत्य को संरक्षण नहीं दिया जा सकता। अदालत ने नाबालिग से कथित यौन शोषण और बाद में हलाला के नाम पर सामूहिक दुष्कर्म के आरोपों वाले मामले में दर्ज एफआईआर रद्द करने से इनकार करते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया मामला अत्यंत गंभीर है और इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

न्यायालय ने कहा कि यदि पीड़िता की उम्र 18 वर्ष से कम है, तो उसकी सहमति का कोई कानूनी महत्व नहीं है और ऐसे मामलों में पॉक्सो सहित अन्य आपराधिक कानून पूरी तरह लागू होंगे। अदालत ने यह भी कहा कि धार्मिक प्रथाओं की आड़ लेकर किसी अपराध को वैध नहीं ठहराया जा सकता तथा कानून से ऊपर कोई परंपरा नहीं हो सकती।

मामला अमरोहा जिले के सैदनगली थाना क्षेत्र का है। आरोप है कि वर्ष 2015 में नाबालिग लड़की का जबरन विवाह कराया गया। बाद में तीन तलाक के बाद उसे निकाह हलाला के नाम पर शारीरिक संबंध बनाने के लिए मजबूर किया गया। शिकायत के अनुसार वर्ष 2025 में दोबारा विवाह कराने के बहाने हलाला की आड़ में उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म की साजिश रची गई, जिसमें कई लोगों को आरोपी बनाया गया है।

हाईकोर्ट ने इस मामले से जुड़ी सभी याचिकाएं खारिज करते हुए पूर्व में दी गई अंतरिम राहत भी समाप्त कर दी। अदालत ने कहा कि मामले की सच्चाई जांच के बाद ही सामने आएगी और इस स्तर पर एफआईआर रद्द करना न्यायहित में नहीं होगा।

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