लखनऊ। सीतापुर से कांग्रेस सांसद राकेश राठौर को दुष्कर्म के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ से बड़ी राहत मिली है। न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी की एकल पीठ ने निचली अदालत के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें राठौर के खिलाफ आरोप तय किए गए थे। कोर्ट ने उनकी उन्मोचन अर्जी स्वीकार करते हुए उन्हें मामले में आरोपों से मुक्त कर दिया।
हाईकोर्ट ने कहा कि अभियोजन की ओर से पेश सामग्री शिकायतकर्ता और राठौर के बीच लंबे समय से सहमति से संबंध होने का संकेत देती है। अदालत के अनुसार, शादी का वादा करके शारीरिक संबंध बनाने का आरोप प्रथम दृष्टया ऐसा मजबूत संदेह पैदा नहीं करता, जिससे कथित अपराध के आधार पर मुकदमा आगे बढ़ाया जा सके।
अदालत ने शिकायतकर्ता के बयान का भी उल्लेख किया। उसके मुताबिक दोनों की मुलाकात सार्वजनिक बैठकों में हुई थी और इसके बाद उनके बीच नजदीकियां बढ़ीं। कोर्ट ने शिकायतकर्ता के पति के बयान को भी देखा, जिसमें कहा गया था कि राठौर उसे अक्सर अपने आवास पर बुलाते थे और वह कई बार देर रात तक वहां रहती थी।
हाईकोर्ट ने शिकायतकर्ता के पति, उसके विवाहित बेटे और बहू के बयानों पर भी विचार किया। अदालत ने अभियोजन की सामग्री में मौजूद परिस्थितियों को देखते हुए कहा कि रिकॉर्ड लंबे समय से चले आ रहे सहमति वाले विवाहेतर संबंध की ओर संकेत करता है। कोर्ट के मुताबिक यह स्थिति शादी का झांसा देकर संबंध बनाए जाने के आरोप से मेल नहीं खाती।
मामले में शिकायतकर्ता ने जनवरी 2025 में सीतापुर कोतवाली में एफआईआर दर्ज कराई थी। आरोप था कि वर्ष 2020 में राठौर ने शादी का भरोसा देकर उसके साथ दुष्कर्म किया। मामले में निचली अदालत ने राठौर की उन्मोचन अर्जी खारिज कर आरोप तय किए थे। हाईकोर्ट ने अब 5 मई 2025 के उस आदेश को निरस्त करते हुए उन्मोचन अर्जी मंजूर कर ली है।
अदालत ने कहा कि जब उपलब्ध अभियोजन सामग्री से आरोप के समर्थन में मजबूत प्रथमदृष्टया संदेह नहीं बनता और रिकॉर्ड में परस्पर विरोधी परिस्थितियां मौजूद हैं, तब आपराधिक कार्यवाही जारी रखना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा।


