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Sunday, August 23, 2026
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संपादकीय

कहानी:पेट

विजय गर्गदुकान बंद करने का समय हो आया था। तभी दो औरतें और आ गईं "भैया साड़ियां दिखा देना कॉटन की, चुनरी प्रिंट में", आज...

श्रीनिवास रामानुजन: एक स्लेट ओर चाक से कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय तक

विजय गर्ग श्रीनिवास रामानुजन का जन्म 1887 में दक्षिणी भारत के इरोड नामक एक छोटे से गाँव में हुआ था। उनका परिवार गरीब था, और...

महिला सुरक्षा पर फिर उठे सवाल, समाज और जिम्मेदारों की जवाबदेही

प्रशान्त कटियार एक बार फिर एक मासूम बच्ची की चीखें खेतों, घरों और दीवारों के पीछे गुम हो गईं। 13 वर्षीय किशोरी की लाश भूसे...

खुद की ओर लौटो: खुश रहने की असली राह

दूसरों की मुस्कान के पीछे का सच न जानकर हम खुद को दुखी करते हैं – आत्मचिंतन ही समाधान है। शरद कटियार आज का इंसान तकनीक...

शोएब में है समाज सेवा भाव, हर धर्म सिखाता इंसानियत

अनुज मिश्र (स्वतंत्र विचारक) शाहजहांपुर त्याग और बलिदान की धरती को क्रांतिकारी की धरा कहा जाता है। बहुत ही साधारण गांव में जन्मे एक ऐसे...

हिंदी पत्रकारिता दिवस: खबरों के साधन बढ़े पर खबर का स्तर गिरा

अशोक मधुप (वरिष्ठ पत्रकार) भारत में पत्रकारिता एक समय पर लोकतंत्र का चौथा स्तंभ मानी जाती थी। समाज की आवाज़ उठाने, सत्ता से सवाल पूछने और...

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