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Sunday, August 23, 2026
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संपादकीय

लोकतंत्र में दबंगई का बोलबाला— कानपुर के खासपुर की त्रासदी और प्रशासनिक निष्क्रियता

  शरद कटियार भारत (India) जैसे लोकतांत्रिक देश (democratic country) में, जहां संविधान प्रत्येक नागरिक को समानता, स्वतंत्रता (Freedom) और न्याय का अधिकार प्रदान करता है,...

घटती स्मरण शक्ति चिंतनीय

विजय गर्ग हाल में एप के माध्यम से टैक्सी सेवा प्रदान करने वाली कंपनी 'उबर' द्वारा देश के पांच शहरों में किए गए एक सर्वेक्षण...

जब तक जीना, तब तक सीखना — अनुभव ही सबसे बड़ा गुरु

- स्वामी विवेकानंद के विचारों से सीखिए कि कैसे निरंतर अध्ययन और अनुभव से ही जीवन का सही मार्ग मिलता है। भरत चतुर्वेदी "जब तक...

भारत की वर्तमान शिक्षा व्यवस्था, बेरोजगारी और महंगाई: तीन सिरों वाला संकट

शरद कटियार भारत एक युवा देश है। 65 प्रतिशत से अधिक आबादी 35 वर्ष से कम आयु की है। यह जनसांख्यिकीय (demographic) स्थिति किसी भी...

जलवायु लचीलापन विकास के मूल में होना चाहिए

विजय गर्ग भारत ने हाल ही में जापान और जर्मनी दोनों को पार करते हुए दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनकर एक उल्लेखनीय मील...

“दो जून की रोटी”: भूख, सम्मान और अस्तित्व की गाथा

आभास मिश्रा की लेखनी पर एक दृष्टि "दो जून की रोटी"—यह सिर्फ एक मुहावरा नहीं, बल्कि भारतीय समाज के सबसे बुनियादी और गहरे संघर्ष का...

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