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Tuesday, February 3, 2026

आरटीआई में बड़ा खुलासा: सूचना दबाने पर आयोग सख्त

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– निशा कटियार के मामले में कन्नौज के सीओ व विवेचक को कारण बताओ नोटिस

लखनऊ/कन्नौज: सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी को दबाने और भ्रामक सूचना देने के गंभीर मामले में उत्तर प्रदेश सूचना आयोग (information commission) ने कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने कन्नौज के नगर क्षेत्राधिकारी अभिषेक प्रताप अजेय तथा थाना गुरसहायगंज के उप निरीक्षक/विवेचक विमल कुमार कश्यप को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

यह मामला अपीलार्थिनी निशा कटियार, पत्नी स्वर्गीय उमेश चन्द्र कटियार, निवासी शिवाजी नगर, कन्नौज से जुड़ा है। अपीलार्थिनी द्वारा पुलिस से एक आपराधिक मामले से संबंधित सूचना आरटीआई के माध्यम से मांगी गई थी, लेकिन समय पर व सही जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई।

दस्तावेजों के अनुसार यह प्रकरण एफ आई आर संख्या 0758, दिनांक 19.12.2024, थाना गुरसहायगंज, जनपद कन्नौज से संबंधित है, जो बीएनएस की धारा 281, 106, 125-B के अंतर्गत दर्ज है। अपीलार्थिनी ने आरटीआई में यह जानना चाहा था कि क्या वह इस एफआईआर की शिकायतकर्ता/आवेदक हैं, क्या जांच के दौरान उनका बयान दर्ज हुआ, तथा मामले की वर्तमान स्थिति क्या है।

आयोग ने पाया कि मांगी गई सूचना सीधे पुलिस रिकॉर्ड से जुड़ी होने के बावजूद अधूरी, भ्रामक और असंतोषजनक जानकारी दी गई, जिससे न केवल अपीलार्थिनी को गुमराह किया गया बल्कि आयोग के आदेशों की भी अवहेलना हुई।

सूचना आयोग के समक्ष हुई सुनवाई में प्रतिवादी पक्ष कोई ठोस व संतोषजनक जवाब नहीं दे सका। आयोग ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि यह स्थिति आरटीआई एक्ट –2005 के उल्लंघन की श्रेणी में आती है और प्रथम दृष्टया सूचना देने में जानबूझकर टालमटोल प्रतीत होती है।

आयोग ने निर्देश दिए हैं कि संबंधित अधिकारी यह स्पष्ट करें कि उनके विरुद्ध धारा 20(1) के तहत प्रतिदिन ₹250 की दर से (अधिकतम ₹25,000 तक) जुर्माना क्यों न लगाया जाए। अंतिम अवसर देते हुए आयोग ने 09 फरवरी 2026 को स्वयं उपस्थित होकर लिखित स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के आदेश दिए हैं।

सूचना आयोग की इस सख्ती से पुलिस महकमे में हड़कंप है। जानकारों का कहना है कि यदि संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया तो यह मामला नज़ीर बनेगा और भविष्य में आरटीआई मामलों में लापरवाही करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की राह खुलेगी।

स्पष्ट संदेश—सूचना छिपाने की कीमत अब चुकानी पड़ेगी।

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