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Sunday, March 29, 2026

बैंकिंग सेवाओं से अब भी वंचित 61 हजार गांव-कस्बे, आरबीआई के निर्देश पर तेज हुई कवायद

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में वित्तीय समावेशन की दिशा में अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई है, जहां राज्य के 61 हजार से अधिक गांव और कस्बे आज भी बैंकिंग सुविधाओं से पूरी तरह नहीं जुड़ पाए हैं। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने सभी बैंकों को ऐसे बैंकिंग-विहीन केंद्रों की सूची भेजकर जल्द से जल्द सेवाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में कुल 62,404 ऐसे केंद्र चिन्हित किए गए थे, जिनमें से अधिकांश अब भी बुनियादी बैंकिंग सेवाओं से दूर हैं। इनमें 61,949 केंद्र टियर-6 श्रेणी के हैं, जहां आबादी 5 हजार से कम है और भौगोलिक व आर्थिक कारणों के चलते बैंक शाखाएं खोलना चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।
आरबीआई के निर्देशों के बाद बैंकों ने इन क्षेत्रों में माइक्रो लेवल सर्वे शुरू कर दिया है, ताकि स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार सेवाओं का विस्तार किया जा सके। प्राथमिकता उन गांवों और कस्बों को दी जा रही है, जहां आबादी 4 से 5 हजार के बीच है। पहले चरण में 641 केंद्र चिन्हित किए गए थे, जिनमें से 618 तक बैंकिंग सेवाएं विभिन्न माध्यमों से पहुंच चुकी हैं, जबकि 23 केंद्र अब भी सेवाओं से वंचित हैं। इन शेष क्षेत्रों में दुर्गम वन क्षेत्र, बाढ़ प्रभावित इलाकों और पहुंच की कठिनाइयों को मुख्य बाधा माना जा रहा है।
बैंकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे पारंपरिक शाखाएं खोलने के बजाय बैंकिंग आउटलेट, बैंक मित्र और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से सेवाएं उपलब्ध कराएं, जिससे लागत कम होने के साथ-साथ दूरदराज के क्षेत्रों तक पहुंच आसान हो सके। राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (एसएलबीसी) के माध्यम से इस अभियान की लगातार समीक्षा की जा रही है और बैंकों को प्रत्येक केंद्र की प्रगति रिपोर्ट नियमित रूप से आरबीआई को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। जिला स्तर पर भी प्रशासन और बैंकों के बीच समन्वय बढ़ाया गया है, ताकि कार्य में तेजी लाई जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि बैंकिंग सेवाओं के विस्तार से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी। जनधन योजना, पेंशन, सब्सिडी और डिजिटल भुगतान जैसी सुविधाएं सीधे लाभार्थियों तक पहुंच सकेंगी, जिससे आर्थिक गतिविधियों में तेजी आएगी और पारदर्शिता भी बढ़ेगी। इस पूरे अभियान की निगरानी के लिए एक उप-समिति का गठन किया गया है, जिसकी नियमित बैठकें आयोजित की जा रही हैं। हाल ही में फरवरी माह में हुई बैठक में शेष केंद्रों पर तेजी से सेवाएं शुरू करने के निर्देश दिए गए, ताकि प्रदेश के अंतिम व्यक्ति तक बैंकिंग सुविधा पहुंचाई जा सके।

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