मिलावट से नुकसान का भी अंदेशा, मिठाई बाजार की तैयारी
फर्रुखाबाद। दीपावली का त्यौहार नजदीक आते ही बाजारों में शकर के साथ ही मिट्टी से बने खिलौनों की दूकाने से गयीं हैं।
शंकर से बने हाथी-घोड़े, शेर, मीनार, मछली, मुर्गा, झोपड़ी, ताजमहल आदि जैसी रंग-बिरंगी आकृतियां देखकर खाने के लिए जी ललचाने लगता है। बच्चे तो इसके दीवाने हैं ही, मधुमेह से बचे युवा और बुजुर्ग भी इसका सेवन करते हैं। दशहरा से लेकर दीपावली, करवा चौथ, अन्नकूट और छठ तक तो इसकी मांग जबरदस्त बढ़ी रहती है।
ग्रामीण क्षेत्रों में लगने वाले मेले में इसकी बिक्री को देखकर कारोबारी पहले से ही सक्रिय हो जाते हैं। लोगों को ललचाने और ज्यादा बिक्री के लिए चीनी से बनी इन मिठाइयों में अखाद्य रंगों का इस्तेमाल शुरू कर दिया गया है। यह रंग स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक होते हैं।
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग रंग से बनी मिठाइयों के इस्तेमाल से बचने की सलाह दे रहा हैं। खाद्य पदार्थों में रंगों का इस्तेमाल हाल के वर्षों में बढ़ गया है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने कुछ शर्तों के साथ खाद्य रंगों के इस्तेमाल की अनुमति दी है लेकिन यह रंग महंगे होते हैं।
इस कारण ज्यादातर कारोबारी अखाद्य रंगों का इस्तेमाल करते हैं। वह इन रंगों को औने-पौने दाम में खरीदकर मिठाई में मिलाते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अखाद्य रंग पेट में जाने के बाद बाहर नहीं निकल पाते हैं। यह रंग आंत में इकट्ठा होकर कैंसर का कारण बन सकते हैं। साथ ही लिवर को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं।




