14 C
Lucknow
Monday, February 2, 2026

अयोध्या का नया दौर: मंदिर संग्रहालय से बदलेगी सांस्कृतिक पहचान, यूपी पर्यटन में इतिहास-निर्माण

Must read

लखनऊ, अयोध्या: (Ayodhyaकी सांस्कृतिक विरासत को नया वैश्विक आयाम देने की दिशा में उत्तर प्रदेश सरकार ने आज एक ऐतिहासिक कदम उठाया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक ने राज्य के पर्यटन परिदृश्य में बड़ा बदलाव लाने वाले तीन महत्वपूर्ण प्रस्तावों—अयोध्या में विश्व स्तरीय मंदिर संग्रहालय, उत्तर प्रदेश अधीनस्थ पर्यटन सेवा नियमावली 2025, और बागपत में अंतरराष्ट्रीय योग एवं वेलनेस सेंटर—को मंजूरी दे दी है। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने इन प्रस्तावों को प्रदेश के सांस्कृतिक और पर्यटन ढांचे के लिए “मील का पत्थर” बताया।

मंत्री जयवीर सिंह के अनुसार, लंबे समय से अयोध्या में एक ऐसे व्यापक सांस्कृतिक केंद्र की आवश्यकता महसूस की जा रही थी, जहाँ प्राचीन मंदिर वास्तुकला, धार्मिक दर्शन, सांस्कृतिक विरासत और क्षेत्रीय कलाओं का सुव्यवस्थित और आधुनिक प्रस्तुतीकरण हो सके। राम मंदिर निर्माण और रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद अयोध्या में प्रतिदिन 2 से 4 लाख श्रद्धालु और पर्यटक पहुंच रहे हैं। इतने बड़े पैमाने पर आने वाले श्रद्धालुओं को देखते हुए संग्रहालय की जरूरत और भी महत्वपूर्ण हो गई थी।

कैबिनेट द्वारा स्वीकृत परियोजना के तहत अयोध्या के ग्राम मांझा जमधरा में कुल 52.102 एकड़ नजूल भूमि पर्यटन विभाग के पक्ष में हस्तांतरित की जाएगी। टाटा समूह की CSR इकाई के साथ 3 सितंबर 2024 को हुए त्रिपक्षीय एमओयू के अनुसार, संग्रहालय का निर्माण और संचालन टाटा ग्रुप करेगा। पहले 25 एकड़ भूमि आवंटित की गई थी, जिसे अब बढ़ाकर 52.102 एकड़ कर दिया गया है। भूमि मात्र 1 रुपए वार्षिक लीज पर 90 वर्ष के लिए दी जाएगी, जिससे परियोजना को दीर्घकालिक स्थिरता मिलेगी।

पर्यटन मंत्री ने बताया कि प्रस्तावित विश्वस्तरीय मंदिर संग्रहालय न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होगा, बल्कि यह भारत की प्राचीन मंदिर वास्तुकला—नागर, द्रविड़ और वेसर शैलियों—का जीवंत दस्तावेज भी बनेगा। संग्रहालय में पुरातात्विक अवशेष, पारंपरिक मंदिर निर्माण तकनीक, पौराणिक कथाएं, ग्रंथों पर आधारित डिजिटल डिस्प्ले, 3-D इंटरैक्टिव गैलरी और सांस्कृतिक कला विरासत का अनूठा संग्रह होगा। यह संस्थान विश्व भर से आने वाले आगंतुकों को आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक दृष्टि से एक समृद्ध अनुभव प्रदान करेगा।

सरकार का दावा है कि इस परियोजना से न केवल अयोध्या की सांस्कृतिक पहचान सुदृढ़ होगी, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था, रोजगार और पर्यटन कारोबार को भी बड़ा लाभ मिलेगा। बड़े पैमाने पर प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे और अयोध्या धाम का आध्यात्मिक पर्यटन विश्व स्तर पर और अधिक मजबूत होगा।

 

कैबिनेट की दूसरी महत्वपूर्ण स्वीकृति उत्तर प्रदेश अधीनस्थ पर्यटन सेवा नियमावली 2025 है। नई नियमावली के तहत प्रकाशन अधिकारी, अपर/जिला पर्यटन अधिकारी और पर्यटन सूचना अधिकारी के पदों का सृजन किया गया है। अधिकारी स्तर की नियुक्ति यूपी लोक सेवा आयोग और अधीनस्थ पदों की भर्ती यूपी अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के माध्यम से होगी। मंत्री जयवीर सिंह के अनुसार, यह संरचना पर्यटन प्रबंधन को अधिक सुगम, पारदर्शी और दक्ष बनाएगी।

 

वेलनेस पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से तीसरा बड़ा निर्णय बागपत के ग्राम हरिया खेड़ा में अंतरराष्ट्रीय योग एवं वेलनेस सेंटर स्थापित करने का है। लगभग 70.885 हेक्टेयर भूमि पर बनने वाली यह परियोजना सार्वजनिक-निजी सहभागिता (PPP) मॉडल पर विकसित की जाएगी। केंद्र में योग, आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा और संपूर्ण वेलनेस कार्यक्रमों की विश्वस्तरीय सुविधाएं होंगी, जिससे यूपी वैश्विक वेलनेस टूरिज्म के मानचित्र पर मजबूत उपस्थिति दर्ज करेगा।

 

पर्यटन मंत्री ने कहा कि अयोध्या को विश्वस्तरीय सुविधाओं के साथ एक सांस्कृतिक और आध्यात्मिक केंद्र के रूप में स्थापित करना सरकार की प्राथमिकता है। नई नियमावलियों और परियोजनाओं के माध्यम से पर्यटन तंत्र अधिक जन-उन्मुख, जवाबदेह और आधुनिक बनेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि इन निर्णयों से उत्तर प्रदेश न केवल भारत बल्कि विश्व के प्रमुख पर्यटन स्थलों की सूची में अपनी स्थिति और मजबूत करेगा।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

Must read

More articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Latest article