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Tuesday, July 14, 2026

वृक्ष बढ़ना बंद करने के बाद भी लंबे समय तक कार्बन अवशोषित करते रहते हैं

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डॉ विजय गर्ग
जलवायु परिवर्तन आज पूरी दुनिया के सामने सबसे बड़ी पर्यावरणीय चुनौतियों में से एक है। बढ़ती कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा पृथ्वी के तापमान को लगातार बढ़ा रही है, जिसके परिणामस्वरूप ग्लोबल वार्मिंग, चरम मौसम की घटनाएँ, सूखा, बाढ़ और जैव विविधता का संकट गहराता जा रहा है। ऐसे समय में वृक्ष प्रकृति के सबसे बड़े रक्षक बनकर सामने आते हैं। लंबे समय तक यह माना जाता रहा कि पेड़ मुख्य रूप से अपने तेज़ी से बढ़ने के दौरान ही अधिक कार्बन अवशोषित करते हैं। लेकिन हाल के वैज्ञानिक अध्ययनों से पता चला है कि वृक्ष अपनी वृद्धि लगभग रुक जाने के बाद भी वर्षों तक वातावरण से कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित और संग्रहित करते रहते हैं।

यह खोज जलवायु परिवर्तन से निपटने की हमारी रणनीतियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और यह स्पष्ट करती है कि पुराने और परिपक्व वृक्षों का संरक्षण उतना ही आवश्यक है जितना नए पेड़ लगाना।

प्रकृति के कार्बन बैंक हैं वृक्ष

वृक्ष प्रकाश संश्लेषण (फोटोसिंथेसिस) की प्रक्रिया द्वारा वातावरण से कार्बन डाइऑक्साइड ग्रहण करते हैं और सूर्य के प्रकाश की सहायता से अपना भोजन बनाते हैं। इस प्रक्रिया में वे कार्बन को अपने तने, शाखाओं, जड़ों और पत्तियों में वर्षों तक सुरक्षित रखते हैं।

यही कारण है कि वृक्षों को प्राकृतिक कार्बन बैंक कहा जाता है। वे वातावरण से कार्बन हटाकर उसे लंबे समय तक अपने भीतर संचित रखते हैं, जिससे ग्रीनहाउस गैसों की मात्रा कम होती है।

पुराने वृक्ष भी करते हैं कार्बन का संग्रह

पहले यह धारणा थी कि जैसे-जैसे वृक्षों की ऊँचाई और मोटाई बढ़ना कम हो जाती है, वैसे-वैसे उनका कार्बन अवशोषण भी कम हो जाता है। लेकिन नवीन शोध बताते हैं कि परिपक्व वृक्ष अपने विकास की गति धीमी होने के बाद भी कार्बन को लगातार संग्रहित करते रहते हैं।

यद्यपि उनकी ऊँचाई में अधिक वृद्धि नहीं होती, फिर भी उनकी लकड़ी, जड़ों और अन्य ऊतकों में कार्बन का संचय जारी रहता है। कई सौ वर्ष पुराने वृक्ष अपने जीवनकाल में भारी मात्रा में कार्बन को सुरक्षित रखते हैं।

पुराने जंगलों का महत्व

परिपक्व वन केवल कार्बन संग्रह करने वाले क्षेत्र ही नहीं हैं, बल्कि वे पृथ्वी के सबसे समृद्ध पारिस्थितिक तंत्रों में से एक हैं। ऐसे जंगल—

– हजारों वन्य जीवों और पक्षियों का घर होते हैं।
– मिट्टी का कटाव रोकते हैं।
– भूजल संरक्षण में सहायता करते हैं।
– वर्षा चक्र को संतुलित रखते हैं।
– स्थानीय तापमान को नियंत्रित करते हैं।
– वायु को शुद्ध बनाते हैं।

यदि ऐसे वृक्षों को काट दिया जाए, तो उनमें वर्षों से संचित कार्बन पुनः वातावरण में पहुँच सकता है, जिससे जलवायु परिवर्तन की समस्या और गंभीर हो सकती है।

केवल वृक्षारोपण ही पर्याप्त नहीं

पिछले कुछ वर्षों में वृक्षारोपण अभियानों पर विशेष जोर दिया गया है। यह अत्यंत आवश्यक है, लेकिन केवल नए पौधे लगाना पर्याप्त नहीं है। एक छोटा पौधा उस स्तर तक पहुँचने में कई दशक लगा देता है, जहाँ वह एक परिपक्व वृक्ष जितना कार्बन संग्रह कर सके।

इसलिए जलवायु परिवर्तन से प्रभावी ढंग से लड़ने के लिए नए वृक्ष लगाने के साथ-साथ पुराने वृक्षों और प्राकृतिक वनों का संरक्षण भी समान रूप से आवश्यक है।

हम क्या कर सकते हैं?

प्रत्येक नागरिक पर्यावरण संरक्षण में योगदान दे सकता है—

– अधिक से अधिक देशी प्रजातियों के वृक्ष लगाएँ।
– अनावश्यक वृक्ष कटाई का विरोध करें।
– वन संरक्षण अभियानों में भाग लें।
– कागज और लकड़ी का सोच-समझकर उपयोग करें।
– बच्चों और युवाओं में वृक्षों के महत्व के प्रति जागरूकता फैलाएँ।

छोटे-छोटे प्रयास मिलकर पर्यावरण की रक्षा में बड़ा योगदान दे सकते हैं।

निष्कर्ष

यह वैज्ञानिक खोज कि वृक्ष अपनी वृद्धि धीमी या लगभग बंद होने के बाद भी लंबे समय तक कार्बन अवशोषित करते रहते हैं, हमें प्रकृति के प्रति अपनी सोच बदलने का अवसर देती है। परिपक्व वृक्ष केवल अतीत की धरोहर नहीं, बल्कि भविष्य की सुरक्षा के प्रहरी हैं।

यदि हमें जलवायु परिवर्तन की चुनौती का प्रभावी समाधान खोजना है, तो नए वृक्ष लगाने के साथ-साथ पुराने वृक्षों और प्राकृतिक वनों की रक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी। हर जीवित वृक्ष पृथ्वी के लिए एक अनमोल संपत्ति है, जो चुपचाप वातावरण से कार्बन हटाकर आने वाली पीढ़ियों के लिए अधिक सुरक्षित, स्वच्छ और संतुलित भविष्य का निर्माण कर रहा है।
डॉ विजय गर्ग सेवानिवृत्त प्रिंसिपल मलोट पंजाब

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