शमशाबाद (फर्रुखाबाद)। बाल पोषाहार वितरण में कथित भ्रष्टाचार का विरोध करना एक परिवार को महंगा पड़ गया। आरोप है कि आंगनबाड़ी कार्यकत्री ने पोषाहार की मांग करने पहुंची पीड़ित की पत्नी के साथ अपने पुत्रों के सहयोग से अभद्रता की और दोबारा केंद्र पर आने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी। मामले में पीड़ित ने बाल विकास परियोजना अधिकारी (सीडीपीओ) शमशाबाद को शिकायती पत्र देकर जांच और कार्रवाई की मांग की है।
जानकारी के अनुसार विकासखंड शमशाबाद क्षेत्र के ग्राम करनपुर गंगतारा निवासी अलीम पुत्र सबीब ने शनिवार को सीडीपीओ कार्यालय में प्रार्थना पत्र दिया। पत्र में बताया गया है कि उसका 6 वर्षीय पुत्र रहान गांव में संचालित आंगनबाड़ी केंद्र में पंजीकृत है। आरोप है कि आंगनबाड़ी कार्यकत्री सुनीता हर माह बच्चे का अंगूठा लगवाकर ओटीपी तो पूछ लेती हैं, लेकिन सरकार द्वारा उपलब्ध कराया जाने वाला बाल पोषाहार—दाल, दलिया, रिफाइंड आदि—नहीं देतीं।
पीड़ित का कहना है कि जब भी पोषाहार के संबंध में पूछा जाता है, तो कार्यकत्री आज-कल का बहाना बनाती हैं या फिर पोषाहार समाप्त होने की बात कह देती हैं। आरोप है कि पूरा वर्ष बीत जाने के बावजूद बच्चे को पोषाहार के नाम पर कुछ भी उपलब्ध नहीं कराया गया।
शिकायती पत्र के अनुसार 28 फरवरी को पीड़ित की पत्नी आंगनबाड़ी केंद्र पहुंची और पोषाहार उपलब्ध कराने की मांग की। इस पर कार्यकत्री कथित रूप से आगबबूला हो गईं और अपने पुत्रों के साथ मिलकर गाली-गलौज करते हुए धमकी देने लगीं। आरोप है कि उन्होंने कहा कि यदि बाल पोषाहार के नाम पर दोबारा नजर आईं तो अंजाम अच्छा नहीं होगा।
पीड़ित ने आरोप लगाया कि अंगूठा लगवाकर और ओटीपी लेकर रिकॉर्ड में वितरण दर्शाया जा रहा है, जबकि वास्तविकता में पोषाहार नहीं दिया जा रहा। केंद्र में दबंगई के बल पर कथित भ्रष्टाचार चलने का आरोप लगाते हुए पीड़ित ने सीडीपीओ से निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करने और परिवार को न्याय दिलाने की मांग की है।


