लखनऊ
प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर आस्था और राजनीति के मुद्दे पर तीखा टकराव देखने को मिला है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा सोशल मीडिया पर इटावा स्थित निर्माणाधीन श्री केदारेश्वर महादेव मंदिर में प्रभु राम की अभिराम मूर्ति से जुड़ा पोस्ट साझा करने के बाद सियासी बयानबाज़ी तेज हो गई। इस पोस्ट को लेकर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने सपा पर तीखा हमला बोला।
केशव प्रसाद मौर्य ने अपने बयान में सपा की राजनीति को ‘अवसरवादी’ करार देते हुए कहा कि भाजपा के डर से पहले मंदिर बनवाने और अब रामलला की मूर्ति लगाने की बात करना सपा का नया राजनीतिक चेहरा है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस पार्टी के दामन पर रामभक्तों के खून के छींटे लगे हों, वह आज रामभक्ति का स्वांग रच रही है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अगर सपा की नीयत साफ होती तो श्रीकृष्ण जन्मभूमि और अन्य विवादित धार्मिक स्थलों पर भी स्पष्ट रुख अपनाती।
इस तीखे हमले के बाद बुधवार को अखिलेश यादव ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से पलटवार किया। उन्होंने कहा कि उनकी आस्था को ‘स्वांग’ कहने वालों के खिलाफ वे मानहानि का दावा भी कर सकते थे, लेकिन जिनका स्वयं का कोई ‘मान’ नहीं है, उनके लिए उन्हें सहानुभूति है। अपने बयान में उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि “अगर स्टूल भी छिन गया तो कहाँ जाएंगे?” और इशारों-इशारों में विरोधियों की राजनीतिक स्थिति पर तंज कसा।
अखिलेश यादव ने आगे व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि कुछ लोग अपनी ही पार्टी में ‘प्रतीक्षारत’ रहते हैं और कुर्सी के इंतजार में गुनगुनाते रहते हैं, जबकि जनता सब समझती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनता ही अंततः सच्चाई का फैसला करेगी।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद प्रदेश की राजनीति में धार्मिक आस्था और चुनावी रणनीति को लेकर बहस तेज हो गई है। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले ऐसे बयान यह संकेत दे रहे हैं कि आने वाले समय में सियासी आरोप-प्रत्यारोप और भी तीखे हो सकते हैं।


