शाहजहांपुर: जनपद में ओवरलोड वाहनों (overloaded vehicles) पर कार्रवाई को लेकर एआरटीओ प्रवर्तन (ARTO enforcement) के दावे एक बार फिर सवालों के घेरे में हैं। खबरें चलने के बाद महज़ एक-दो दिन दिखावटी कार्रवाई होती है, फिर पूरा अभियान ठंडे बस्ते में चला जाता है। सवाल यह है कि जब ओवरलोड वाहनों पर रोक लगाने के लिए ही विभाग की तैनाती है, तो फिर खुलेआम ओवरलोड वाहन सड़कों पर कैसे फर्राटा भर रहे हैं ?
बालू से भरे भारी-भरकम डंपर फर्रुखाबाद से लेकर शाहजहांपुर तक बेधड़क दौड़ रहे हैं, लेकिन एआरटीओ प्रवर्तन की नजर इन पर क्यों नहीं पड़ती ? क्या विभाग किसी बड़े हादसे का इंतज़ार कर रहा है ?
ताज़ा मामला दिल्ली-लखनऊ नेशनल हाईवे-24 का है, जहां तेज रफ्तार ओवरलोड भूसे से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली पलट गई। ट्रॉली पलटते ही नेशनल हाईवे पर भूसा बिखर गया, जिससे लंबा जाम लग गया और राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। यह हादसा थाना रोजा क्षेत्र के गुर्री चौकी के पास हुआ।
इस घटना ने एआरटीओ द्वारा ओवरलोड वाहनों पर की जा रही कार्रवाई के दावों की पोल खोलकर रख दी है। सवाल अब भी वही है—क्या जिम्मेदार अधिकारी जागेंगे या फिर किसी और बड़े हादसे के बाद ही कार्रवाई होगी?


