एटा। जिले के एटा मेडिकल कॉलेज में बुधवार को लिफ्ट बंद होने की घटना ने मरीजों और तीमारदारों के बीच हड़कंप मचा दिया। कॉलेज की इमारत में छठवीं मंजिल तक पहुँचने के लिए कुल चार लिफ्टें लगी हैं, लेकिन इन लिफ्टों की मरम्मत और रख-रखाव की नियमितता न होने के कारण यह कई बार अचानक रुक जाती हैं। बुधवार को दोपहर लगभग 12 बजे पांचवें तल से नीचे उतरते समय एक लिफ्ट अचानक दूसरे तल पर रुक गई, जिसमें 5 से 6 मरीज और उनके तीमारदार फंस गए।
लिफ्ट में फंसे लोग भयभीत हो गए और उन्होंने लगे इमरजेंसी नंबर पर कॉल करने की कोशिश की, लेकिन तकनीकी समस्या के कारण कॉल नहीं लग सकी। थोड़ी ही देर में लिफ्ट में मौजूद लोगों में चीख-पुकार मच गई और वहां हड़कंप फैल गया। लिफ्ट में फंसे लोगों ने अपने परिजनों को फ़ोन करके स्थिति की जानकारी दी, जिससे सुरक्षा कर्मियों को घटना की सूचना मिल सकी।
घटना की सूचना पाते ही सिक्योरिटी गार्ड मौके पर पहुंचे। प्रथम तल पर पहुंचे गार्ड ने कड़ी मशक्कत के बाद लिफ्ट खोली और फंसे हुए लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। इस दौरान कोई गंभीर चोट नहीं आई, लेकिन फंसे लोगों की घबराहट और भय की स्थिति देखने लायक थी।
कॉलेज के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमएस) डॉ. सुरेश चंद्रा ने बताया कि लिफ्ट में अचानक विद्युत आपूर्ति बंद होने के कारण यह रुक गई थी। उन्होंने कहा कि लिफ्ट में फंसे लोगों को समय रहते बाहर निकाल लिया गया और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की गई।
स्थानीय लोगों और मरीजों का कहना है कि लिफ्टों की बार-बार खराब होने और उनकी नियमित मरम्मत न होने के कारण बुजुर्ग, महिला और बच्चे बार-बार परेशान हो रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से अपील की है कि लिफ्टों की नियमित जाँच, मरम्मत और इमरजेंसी व्यवस्था को दुरुस्त किया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जा सके।
मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने कहा कि जल्द ही सभी लिफ्टों की पूर्ण जांच और मरम्मत कराई जाएगी। इसके अलावा, इमरजेंसी बिजली की व्यवस्था और कॉल सिस्टम को भी दुरुस्त किया जाएगा, ताकि मरीज और तीमारदार सुरक्षित रूप से ऊपर-नीचे जा सकें। प्रशासन ने यह भी आश्वासन दिया कि मरीजों की सुरक्षा और सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी और इस प्रकार की घटनाओं को दोबारा नहीं होने दिया जाएगा।
यह घटना एक चेतावनी है कि मेडिकल कॉलेज जैसी महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संस्थाओं में लिफ्टों और अन्य आधारभूत सुविधाओं का नियमित रख-रखाव बेहद जरूरी है। मरीज और तीमारदार बिना किसी डर या परेशानी के समय पर इलाज और सुविधाओं तक पहुँच सकें, इसके लिए प्रशासन को तत्काल और सतत कदम उठाने की आवश्यकता है।


