मैनपुरी। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश नेतृत्व द्वारा हाल ही में जिला कार्यकारिणी की घोषणा किए जाने के बाद जनपद मैनपुरी में पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आ गया है। नई कार्यकारिणी की सूची जारी होते ही जिले के कई वरिष्ठ एवं सक्रिय कार्यकर्ताओं में नाराजगी फैल गई, जिसका असर कुछ ही घंटों में संगठन के भीतर दिखाई देने लगा।
रविवार को दोपहर लगभग 12 बजे भाजपा के उत्तरी मंडल के अध्यक्ष दीपक चौहान अपने समर्थकों और मंडल कार्यकारिणी के पदाधिकारियों के साथ जिला कार्यालय पहुंचे। यहां उन्होंने सामूहिक रूप से अपने-अपने पदों से इस्तीफा सौंप दिया। इस दौरान बड़ी संख्या में कार्यकर्ता भी मौजूद रहे, जिससे माहौल काफी गरमाया रहा। अचानक हुए इस घटनाक्रम से पार्टी संगठन में हलचल मच गई और स्थानीय स्तर पर नेतृत्व की कार्यशैली को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
इस्तीफा देने वाले नेताओं ने खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए आरोप लगाया कि नई कार्यकारिणी के गठन में वरिष्ठता, अनुभव और संगठन के प्रति समर्पण को नजरअंदाज किया गया है। उनका कहना है कि वर्षों से पार्टी के लिए कार्य कर रहे कार्यकर्ताओं को उचित स्थान नहीं दिया गया, जबकि अपेक्षाकृत नए और जूनियर चेहरों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंप दी गई हैं। इससे कार्यकर्ताओं में असंतोष और उपेक्षा की भावना पैदा हुई है।
खासतौर पर ध्यानेंद्र सिंह उर्फ धीरू राठौर को जिला मंत्री बनाए जाने को लेकर नाराजगी ज्यादा देखने को मिल रही है। मंडल अध्यक्ष दीपक चौहान का कहना है कि ध्यानेंद्र सिंह स्वयं एक वरिष्ठ नेता हैं और व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष भी रह चुके हैं, लेकिन कार्यकारिणी में उनके साथ भी उचित संतुलन नहीं रखा गया। वहीं कई ऐसे नाम शामिल किए गए हैं, जो संगठन में अपेक्षाकृत नए हैं और उन्हें अहम पद दे दिए गए हैं।
स्थानीय नेताओं का यह भी कहना है कि यदि कार्यकारिणी गठन में पारदर्शिता और संतुलन बनाए रखा जाता, तो इस तरह की स्थिति उत्पन्न नहीं होती। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया, तो आगे भी इस तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ सकती हैं।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद मैनपुरी भाजपा में अंदरूनी खींचतान और गुटबाजी की चर्चा तेज हो गई है। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती नाराज कार्यकर्ताओं को मनाने और संगठन को एकजुट बनाए रखने की है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि समय रहते स्थिति को नहीं संभाला गया, तो इसका असर आने वाले चुनावों और संगठनात्मक गतिविधियों पर भी पड़ सकता है।


