प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक एफआईआर में केंद्रीय मंत्री के नाम के आगे ‘माननीय’ या अन्य सम्मानसूचक शब्द न लिखे जाने पर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने इसे प्रोटोकॉल का उल्लंघन मानते हुए उत्तर प्रदेश पुलिस से इस पर स्पष्टीकरण मांगा है।
मामला मथुरा में दर्ज एक सड़क दुर्घटना से जुड़ी एफआईआर को रद्द करने की याचिका की सुनवाई के दौरान सामने आया। जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए कहा कि भले ही शिकायतकर्ता ने अपने बयान में मंत्री का उल्लेख उचित तरीके से न किया हो, लेकिन चेक एफआईआर तैयार करते समय पुलिस का दायित्व था कि वह सम्मानजनक शब्दों का प्रयोग करे।
अदालत ने स्पष्ट टिप्पणी करते हुए कहा कि प्रोटोकॉल के तहत मंत्री के नाम के साथ ‘माननीय’ या ‘श्री’ जैसे शब्द जोड़े जाने चाहिए थे, भले ही उन्हें ब्रैकेट में ही क्यों न लिखा जाता। इस लापरवाही को गंभीर मानते हुए कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब तलब किया है।
इस संबंध में अपर मुख्य सचिव (गृह) को शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया गया है। उन्हें यह बताना होगा कि एफआईआर में मंत्री के नाम के साथ सम्मानसूचक शब्दों का प्रयोग क्यों नहीं किया गया और यह चूक किन परिस्थितियों में हुई।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने एक अन्य अहम सवाल भी उठाया। अदालत ने सरकारी अधिवक्ता से पूछा कि जिस फॉर्च्यूनर वाहन (यूपी 52-बीडी-7799) का जिक्र एफआईआर में है, उसका वास्तविक मालिक कौन है और वह किसके कब्जे में था। इस संबंध में भी विस्तृत जानकारी अगली सुनवाई में प्रस्तुत करने को कहा गया है।
कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 6 अप्रैल को निर्धारित की है। इस घटनाक्रम के बाद प्रशासनिक और पुलिस महकमे में हलचल बढ़ गई है, वहीं इसे प्रोटोकॉल और प्रक्रियात्मक सतर्कता के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


