लखनऊ। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 हेल्पलाइन से जुड़े कर्मचारियों का आंदोलन अब तेज और उग्र रूप लेता जा रहा है। साइबर टॉवर में हुए हंगामे के बाद हालात तनावपूर्ण हो गए, जहां पुलिस कार्रवाई की आशंका के बीच कई कर्मचारी इधर-उधर छिपते नजर आए। एक महिला कर्मचारी खुद को बचाते हुए कामता बस स्टैंड तक पहुंच गई, जबकि अन्य कर्मचारी अलग-अलग स्थानों पर जाकर स्थिति पर नजर बनाए रहे।
प्रदर्शन के दूसरे दिन पुलिस ने सख्ती दिखाते हुए धरना दे रहे कर्मचारियों को बसों में बैठाकर ईको गार्डन भेज दिया। इस दौरान कुछ कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके साथ अभद्रता और मारपीट की। हालांकि प्रशासन की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
कर्मचारियों का कहना है कि भर्ती के समय उन्हें 15 हजार रुपये मासिक वेतन का आश्वासन दिया गया था, लेकिन वास्तविकता में उन्हें 7 से 8 हजार रुपये ही दिए जा रहे हैं। इतना ही नहीं, भुगतान भी समय पर नहीं हो रहा है और कई बार वेतन रोककर दिया जाता है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति पर गंभीर असर पड़ रहा है।
आंदोलन कर रहे कर्मचारियों के अनुसार पिछले चार महीनों से उनका वेतन बकाया है। लगातार काम करने के बावजूद भुगतान न मिलने से उनमें आक्रोश बढ़ता जा रहा है। उनका कहना है कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद उनकी समस्याओं की अनदेखी की जा रही है, जिससे मजबूर होकर उन्हें सड़कों पर उतरना पड़ा।
करीब 50 से अधिक कर्मचारी अब भी विरोध पर अड़े हुए हैं और प्रशासन पर आरोप लगा रहे हैं कि उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा। कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें समस्याओं के समाधान के लिए 10 घंटे का समय दिया गया था, लेकिन तय समयसीमा गुजर जाने के बाद भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, उल्टा उन पर दबाव बनाया जा रहा है।
गौरतलब है कि आम जनता की शिकायतों के निस्तारण के लिए बनाई गई यह हेल्पलाइन अब खुद अपने कर्मचारियों के असंतोष से जूझ रही है। वेतन और भर्ती प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों ने पूरे सिस्टम पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है, जिससे यह मुद्दा अब महज कर्मचारी असंतोष तक सीमित न रहकर प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर रहा है।


