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Wednesday, April 1, 2026

ऑस्ट्रेलिया सख्त: बच्चों के सोशल मीडिया बैन पर नहीं झुके टेक दिग्गज, कोर्ट कार्रवाई की तैयारी

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मेलबर्न। ऑस्ट्रेलिया में बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर लगाए गए सख्त कानून को लेकर सरकार और टेक कंपनियों के बीच टकराव बढ़ता जा रहा है। सरकार ने आरोप लगाया है कि कई बड़े प्लेटफॉर्म अब भी नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं।

देश की ई-सेफ्टी आयुक्त जूली इमैन ग्रांट ने अपनी पहली अनुपालन रिपोर्ट में खुलासा किया कि मेटा, स्नैपचैट, यूट्यूब और टिकटॉक जैसे प्लेटफॉर्म बच्चों के खातों पर प्रभावी रोक लगाने में विफल रहे हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, कानून लागू होने के बाद अब तक करीब 50 लाख खातों को निष्क्रिय किया गया है, लेकिन बड़ी संख्या में बच्चे अब भी सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर रहे हैं और नए खाते बनाने में सफल हो रहे हैं।

दरअसल, ऑस्ट्रेलिया ने 10 दिसंबर 2025 से एक सख्त कानून लागू किया है, जिसके तहत 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर खाता बनाना प्रतिबंधित कर दिया गया है।

ई-सेफ्टी आयुक्त ने कहा कि कई प्लेटफॉर्म की उम्र सत्यापन प्रणाली कमजोर है, जिसे बच्चे आसानी से पार कर रहे हैं। इससे कानून का उद्देश्य पूरी तरह हासिल नहीं हो पा रहा है।

सरकार ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए संकेत दिए हैं कि नियमों का पालन न करने वाले प्लेटफॉर्म के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया जा सकता है।

ऑस्ट्रेलिया की संचार मंत्री अनिका वेल्स ने आरोप लगाया कि कुछ सोशल मीडिया कंपनियां जानबूझकर इस कानून को कमजोर करने की कोशिश कर रही हैं।

उन्होंने कहा कि ये कंपनियां न्यूनतम प्रयास कर रही हैं, क्योंकि उन्हें डर है कि यदि यह मॉडल सफल रहा तो अन्य देश भी इसी तरह के कानून लागू कर सकते हैं, जिससे उनके कारोबार पर असर पड़ेगा।

सरकार का मानना है कि यह कानून बच्चों को ऑनलाइन खतरों और लत से बचाने के लिए बेहद जरूरी है, इसलिए इसके पालन में किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

यदि अदालत यह पाती है कि कंपनियों ने नियमों का पालन नहीं किया, तो उन पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है, जो लगभग 4.95 करोड़ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर तक हो सकता है।

हालांकि, फिलहाल रेडिट, एक्स, किक, थ्रेड्स और ट्विच जैसे प्लेटफॉर्म पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऑस्ट्रेलिया का यह कदम दुनिया के अन्य देशों के लिए एक मॉडल बन सकता है, जहां बच्चों की डिजिटल सुरक्षा को लेकर चिंताएं लगातार बढ़ रही हैं।

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