काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन कर व्यवस्थाओं का लिया जायजा
वाराणसी
मंगलवार को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव का महत्वपूर्ण दौरा हुआ। सुबह उनके वाराणसी पहुंचते ही राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई। उनका यह दौरा एमपी-यूपी सहयोग सम्मेलन की अध्यक्षता करने और आगामी सांस्कृतिक कार्यक्रम ‘विक्रमोत्सव’ की तैयारियों का निरीक्षण करने के उद्देश्य से तय किया गया है।
मुख्यमंत्री मोहन यादव जैसे ही लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा पहुंचे, वहां भाजपा के वरिष्ठ नेताओं और जनप्रतिनिधियों ने उनका जोरदार स्वागत किया। स्वागत करने वालों में कई प्रमुख नेता शामिल रहे। एयरपोर्ट से निकलकर मुख्यमंत्री सीधे शहर की ओर रवाना हुए, जहां उन्होंने सबसे पहले काशी विश्वनाथ मंदिर पहुंचकर विधि-विधान से दर्शन-पूजन किया।
मंदिर परिसर में दर्शन के दौरान मुख्यमंत्री ने श्रद्धालुओं के लिए की गई व्यवस्थाओं का बारीकी से निरीक्षण किया। उन्होंने भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था, साफ-सफाई और सुविधाओं को लेकर अधिकारियों से जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए कुछ सुधारात्मक सुझाव भी दिए, ताकि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर अनुभव मिल सके।
अपने दौरे के दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बताया कि वे एमपी-यूपी सहयोग सम्मेलन की अध्यक्षता करेंगे, जिसमें दोनों राज्यों के बीच सांस्कृतिक, आर्थिक और पर्यटन सहयोग को बढ़ाने पर चर्चा होगी। साथ ही उन्होंने 3 अप्रैल को बरेका मैदान में आयोजित होने वाले ‘विक्रमोत्सव महानाट्य’ की तैयारियों का भी जायजा लिया और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी व्यवस्थाएं समय से पूर्ण कर ली जाएं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस प्रकार के सांस्कृतिक आयोजनों से न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्थानीय व्यापार और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि वाराणसी जैसे आध्यात्मिक और सांस्कृतिक शहर में ऐसे कार्यक्रमों का विशेष महत्व है, जो देश की परंपरा और विरासत को सशक्त बनाने का कार्य करते हैं।
यह दौरा वाराणसी के लिए प्रशासनिक और सांस्कृतिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे न केवल धार्मिक स्थलों की व्यवस्थाओं में सुधार की उम्मीद है, बल्कि उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के बीच आपसी सहयोग और समन्वय को भी नई दिशा मिलने की संभावना है।


