नई दिल्ली
ईरान-इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच भारतीय एलपीजी टैंकर ‘पाइन गैस’ ने साहस और धैर्य की मिसाल पेश की। खाड़ी क्षेत्र में फंसे इस जहाज ने 45 हजार मीट्रिक टन रसोई गैस और 27 भारतीय चालक दल के साथ तीन हफ्तों तक बेहद खतरनाक हालात का सामना किया और आखिरकार सुरक्षित वतन लौट आया।
बताया गया कि यह जहाज 11 मार्च को आगे बढ़ने वाला था, लेकिन क्षेत्र में लगातार हो रहे हमलों और युद्ध जैसे हालात के कारण इसे 23 मार्च तक रोकना पड़ा। इस दौरान चालक दल के सदस्यों ने हर दिन आसमान में मिसाइलों और ड्रोन हमलों को बेहद करीब से देखा, जिससे हालात और भी भयावह बने रहे।
जहाज के चीफ ऑफिसर सोहन लाल के अनुसार, यह सफर किसी युद्ध क्षेत्र से गुजरने जैसा था, जहां हर पल खतरे का साया मंडरा रहा था। बावजूद इसके, चालक दल ने हिम्मत नहीं हारी और पूरी जिम्मेदारी के साथ जहाज और उसमें मौजूद गैस को सुरक्षित रखने का काम किया।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए भारतीय नौसेना ने भी जहाज को सुरक्षा प्रदान की, जिसके चलते यह खतरनाक सफर संभव हो सका। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर भारतीय नाविकों के साहस, धैर्य और कर्तव्यनिष्ठा को दुनिया के सामने उजागर किया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के हालात वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर भी असर डाल सकते हैं, लेकिन भारतीय चालक दल ने अपनी बहादुरी से एक बड़े संकट को टाल दिया।


