औरैया
अजीतमल तहसील क्षेत्र के लक्ष्मणपुर गांव में एक अनोखा और हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां 65 वर्षीय राकेश यादव ने अपने जीवनकाल में ही अपनी ‘तेरहवीं’ का आयोजन कर डाला। इस आयोजन के पीछे उनकी अकेलेपन की पीड़ा और भविष्य को लेकर चिंता मुख्य कारण बताई जा रही है। गांव में आयोजित इस कार्यक्रम ने हर किसी को चौंका दिया और क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया।
बताया जा रहा है कि राकेश यादव ने करीब 1900 लोगों को निमंत्रण पत्र भेजकर इस भव्य भोज का आयोजन किया। खास बात यह रही कि निमंत्रण पत्र में बॉलीवुड फिल्म का मशहूर डायलॉग “मुझे तो अपनों ने लूटा, गैरों में कहां दम था, मेरी कश्ती वहां डूबी जहां पानी कम था” भी छपवाया गया, जो उनके मन की स्थिति को दर्शाता है।
सोमवार दोपहर करीब तीन बजे आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीण, रिश्तेदार और आसपास के लोग शामिल हुए। कार्यक्रम में विधि-विधान से कन्या पूजन भी कराया गया और आए हुए मेहमानों को उपहार भेंट किए गए। पूरा आयोजन एक पारंपरिक तेरहवीं की तरह ही संपन्न कराया गया, लेकिन यह सब कुछ व्यक्ति के जीवित रहते हुए किया जाना लोगों के लिए बेहद आश्चर्यजनक रहा।
ग्रामीणों के अनुसार राकेश यादव लंबे समय से अकेले जीवन व्यतीत कर रहे हैं और उन्हें इस बात की चिंता थी कि उनके निधन के बाद कोई उनके संस्कार विधिवत नहीं करेगा। इसी चिंता के चलते उन्होंने यह अनोखा कदम उठाया, ताकि जीवन रहते ही सभी सामाजिक और धार्मिक जिम्मेदारियों को पूरा किया जा सके।
इस घटना के बाद जहां कुछ लोग इसे अंधविश्वास और भावनात्मक कदम मान रहे हैं, वहीं कई लोग इसे बुजुर्ग की मानसिक स्थिति और सामाजिक ताने-बाने पर भी सवाल खड़े कर रहे हैं। फिलहाल यह अनोखी ‘जिंदा तेरहवीं’ पूरे जिले में चर्चा का विषय बनी हुई है।


