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Monday, March 30, 2026

फर्जी हस्ताक्षर से टीसी सत्यापन का खुलासा: मैनपुरी में तीन कॉलेजों के चार प्रमाणपत्र संदिग्ध, जांच शुरू

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मैनपुरी

माध्यमिक शिक्षा विभाग में एक बार फिर बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है, जहां छात्रों के स्थानांतरण प्रमाणपत्र (टीसी) को फर्जी हस्ताक्षरों के जरिए सत्यापित कर बोर्ड को भेज दिया गया। मामला उस समय उजागर हुआ जब माध्यमिक शिक्षा परिषद के क्षेत्रीय कार्यालय मेरठ में टीसी का सत्यापन किया जा रहा था और हस्ताक्षरों के मिलान में गड़बड़ी पाई गई। इसके बाद पूरे मामले ने गंभीर रूप ले लिया और जांच के लिए दस्तावेज मैनपुरी भेजे गए।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, जिले के तीन अलग-अलग कॉलेजों से तीन छात्रों के नाम पर कुल चार टीसी तैयार कर माध्यमिक शिक्षा परिषद को भेजी गई थीं। इनमें छात्र सुमित कुमार और हमजा आमिल के नाम से एक-एक टीसी जारी की गई, जबकि मोहम्मद सलमान के नाम से दो टीसी बनाई गईं। मोहम्मद सलमान की एक टीसी कक्षा 6 से 10 तक की पढ़ाई दर्शाती है, जबकि दूसरी टीसी कक्षा 11 और 12 के लिए जारी की गई है।
बताया जा रहा है कि इन सभी टीसी पर सह जिला विद्यालय निरीक्षक (सहजिला विद्यालय निरीक्षक) के नाम से हस्ताक्षर किए गए थे। जब क्षेत्रीय कार्यालय मेरठ में तैनात अधिकारियों ने सह जिला विद्यालय निरीक्षक रघुराज सिंह पाल के वास्तविक हस्ताक्षरों से इनका मिलान किया, तो स्पष्ट अंतर सामने आया। इसके बाद चारों टीसी को जांच के लिए जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) कार्यालय मैनपुरी भेजा गया, जहां विस्तृत जांच में सभी हस्ताक्षर फर्जी पाए गए।
जांच में यह भी सामने आया कि छात्र सुमित कुमार की टीसी एमकेडी इंटर कॉलेज के नाम से जारी की गई थी, जबकि मोहम्मद सलमान और हमजा आमिल की टीसी एमएकेए इंटर कॉलेज के नाम पर बनाई गई थीं। इसके अलावा मोहम्मद सलमान की दूसरी टीसी एसएसआर इंटर कॉलेज के नाम से जारी की गई बताई जा रही है। एक ही छात्र के नाम पर दो अलग-अलग टीसी जारी होना भी पूरे मामले को और संदिग्ध बना रहा है।
जिला विद्यालय निरीक्षक ने मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित कॉलेजों के प्रधानाचार्यों को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है। साथ ही यह भी संकेत दिए गए हैं कि यदि जांच में दोष सिद्ध होता है, तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ कड़ी विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
इस घटना ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के फर्जीवाड़े से न केवल शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता प्रभावित होती है, बल्कि छात्रों के भविष्य के साथ भी खिलवाड़ होता है। फिलहाल, प्रशासन पूरे मामले की गहनता से जांच कर रहा है और दोषियों की पहचान कर सख्त कार्रवाई की तैयारी में है।

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