अमेरिकी सैन्य तैनाती तेज
तेहरान| पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार गहराता जा रहा है। इसी बीच ईरानी अंग्रेजी अखबार तेहरान टाइम्स ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी देते हुए अपने पहले पृष्ठ पर बड़े अक्षरों में “वेलकम टू हेल” प्रकाशित किया है। अखबार ने साफ शब्दों में कहा है कि यदि कोई भी अमेरिकी सैनिक ईरानी क्षेत्र में प्रवेश करता है, तो वह जिंदा वापस नहीं लौटेगा। इस बयान ने पहले से ही संवेदनशील क्षेत्रीय हालात को और अधिक गंभीर बना दिया है।
दरअसल, इस चेतावनी के बीच अमेरिका ने पश्चिम एशिया में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी है। करीब 3,500 अमेरिकी मरीन सैनिकों को सेंट्रल कमांड (CENTCOM) क्षेत्र में तैनात किया गया है। ये सैनिक जापान से अमेरिका के अत्याधुनिक अम्फीबियस असॉल्ट जहाज यूएसएस त्रिपोली के जरिए रवाना हुए हैं। इसे अमेरिका की सैन्य शक्ति प्रदर्शन की बड़ी रणनीतिक चाल के रूप में देखा जा रहा है।
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इस सैन्य तैनाती का संभावित उद्देश्य ईरान के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण खर्ग द्वीप पर नियंत्रण स्थापित करना हो सकता है। इससे पहले भी “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” के तहत इस द्वीप को निशाना बनाए जाने की चर्चा सामने आ चुकी है, जिससे स्थिति और अधिक संवेदनशील हो गई है।
वहीं, अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक, 28 फरवरी के बाद से ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हमले किए गए हैं। इन हमलों में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े ठिकाने, एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइल साइट्स, नौसैनिक संसाधन और हथियार निर्माण केंद्र शामिल हैं। अमेरिका का दावा है कि अब तक 11,000 से अधिक लड़ाकू उड़ानें भरी जा चुकी हैं और 150 से ज्यादा ईरानी जहाजों को नुकसान पहुंचाया गया है या नष्ट किया गया है।
तेहरान टाइम्स की यह तीखी चेतावनी सीधे तौर पर वॉशिंगटन प्रशासन और अमेरिकी सेना के लिए संदेश मानी जा रही है। जानकारों का कहना है कि बढ़ती सैन्य गतिविधियों और इस तरह के आक्रामक बयानों से पश्चिम एशिया में हालात और बिगड़ सकते हैं, जिसका असर वैश्विक सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ सकता है।


