लखनऊ| प्रदेश में निशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के तहत शैक्षिक सत्र 2026-27 के लिए आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। इस वर्ष निजी स्कूलों में दाखिले के लिए कुल 1.95 लाख सीटें निर्धारित की गई हैं, जो पिछले वर्ष की 1.57 लाख सीटों की तुलना में लगभग 38 हजार अधिक हैं। सीटों में इस बढ़ोतरी से अधिक से अधिक जरूरतमंद बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अवसर मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
शिक्षा विभाग द्वारा इस वर्ष प्रवेश प्रक्रिया को तीन चरणों में सफलतापूर्वक पूरा किया गया। पूरे प्रदेश से कुल 4.44 लाख आवेदन प्राप्त हुए, जो पिछले वर्ष की तुलना में काफी अधिक हैं। अंतिम यानी तीसरे चरण की लॉटरी प्रक्रिया में 39,684 बच्चों को सीटें आवंटित की गई हैं। इससे पहले के चरणों में भी बड़ी संख्या में बच्चों का चयन किया जा चुका है।
पिछले शैक्षिक सत्र 2025-26 की बात करें तो उस समय कुल 2.88 लाख आवेदन प्राप्त हुए थे, जिनमें से लगभग 1.40 लाख बच्चों को निजी स्कूलों में निशुल्क प्रवेश दिया गया था। इस बार आवेदन संख्या और सीटों में बढ़ोतरी को देखते हुए यह अनुमान लगाया जा रहा है कि वर्ष 2026-27 में 1.50 लाख से अधिक बच्चों को इस योजना का लाभ मिल सकेगा।
समग्र शिक्षा अभियान के उप निदेशक डॉ. मुकेश कुमार सिंह ने बताया कि एक अप्रैल से शुरू हो रहे नए शैक्षिक सत्र को ध्यान में रखते हुए सभी बेसिक शिक्षा अधिकारियों को चयनित बच्चों का प्रवेश जल्द से जल्द सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही पूरी प्रक्रिया की दैनिक स्तर पर निगरानी भी की जा रही है, ताकि किसी प्रकार की लापरवाही या देरी न हो।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार की मंशा है कि कोई भी पात्र बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे और उसे बेहतर शिक्षण संस्थानों में पढ़ने का अवसर मिल सके। इस दिशा में प्रशासन पूरी तत्परता से काम कर रहा है।
आरटीई के तहत सीटों में हुई इस बढ़ोतरी को शिक्षा के क्षेत्र में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है, जो न केवल गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों को आगे बढ़ने का अवसर देगा, बल्कि समाज में समानता और समावेशी विकास को भी मजबूती प्रदान करेगा।
आरटीई के तहत निजी स्कूलों में बढ़ीं सीटें, 2026-27 सत्र में 1.95 लाख बच्चों को मिलेगा निशुल्क दाखिले का अवसर


