लखीमपुर खीरी| जनपद में आतंक का कारण बनी एक मादा तेंदुआ को आखिरकार वन विभाग ने सुरक्षित पकड़कर करीब 550 किलोमीटर दूर वाराणसी क्षेत्र में स्थानांतरित कर दिया है। इस कार्रवाई के बाद स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली है, वहीं वन विभाग अब तेंदुए को उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ने की तैयारी में जुटा हुआ है।
जानकारी के अनुसार, लखीमपुर खीरी के मझगई रेंज क्षेत्र में पिछले कुछ दिनों से एक मादा तेंदुआ का मूवमेंट लगातार देखा जा रहा था। इसी दौरान तेंदुए ने दो ग्रामीणों पर हमला कर उन्हें घायल कर दिया था, जिससे पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया था। ग्रामीणों की सुरक्षा को देखते हुए वन विभाग ने तत्काल एक विशेष टीम का गठन किया और तेंदुए को पकड़ने के लिए अभियान चलाया।
काफी मशक्कत के बाद वन विभाग की टीम ने तेंदुए को सफलतापूर्वक पकड़ लिया। इसके बाद उसे पिंजरे में सुरक्षित रखते हुए मझगई रेंज कार्यालय में निगरानी में रखा गया। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, तेंदुए को सुरक्षित स्थान पर छोड़ने के लिए विशेषज्ञों की सलाह ली गई, जिसके बाद उसे वाराणसी भेजने का निर्णय लिया गया।
शुक्रवार की रात रेंजर अंकित सिंह की अगुवाई में वनकर्मियों की टीम तेंदुए को विशेष वाहन से वाराणसी के लिए रवाना हुई। लंबी दूरी तय करने के बाद टीम वाराणसी पहुंची, जहां तेंदुए को कुछ समय विश्राम दिया गया और उसका स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया। जांच में तेंदुआ पूरी तरह स्वस्थ पाया गया।
इसके बाद वन विभाग के उच्च अधिकारियों के निर्देशानुसार तेंदुए को चंदौली जनपद स्थित चंद्रप्रभा वन्यजीव अभयारण्य (काशी वाइल्ड लाइफ सेंक्चुरी क्षेत्र) ले जाया गया, जहां उसे प्राकृतिक वातावरण में छोड़े जाने की तैयारी की जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि इस अभयारण्य का वन क्षेत्र तेंदुए के लिए उपयुक्त है और यहां वह बिना किसी मानव हस्तक्षेप के सुरक्षित रह सकेगा।
वन विभाग ने इस पूरे ऑपरेशन को एक महत्वपूर्ण सफलता बताते हुए कहा है कि इससे न केवल मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने में मदद मिलेगी, बल्कि वन्यजीव संरक्षण के प्रयासों को भी मजबूती मिलेगी। वहीं, लखीमपुर खीरी के ग्रामीणों ने तेंदुए के पकड़े जाने और हटाए जाने पर राहत जताई है और वन विभाग की टीम की सराहना की है।
दो लोगों को घायल करने वाली मादा तेंदुआ 550 किमी दूर भेजी गई, चंद्रप्रभा अभयारण्य में छोड़े जाने की तैयारी


