मथुरा
मोहन भागवत ने वृंदावन में आयोजित जीवनदीप आश्रम के लोकार्पण समारोह के दौरान समाज और विश्व के मौजूदा हालात पर अहम संदेश दिया। उन्होंने कहा कि जीवन में आने वाली कठिनाइयों और संघर्षों से घबराना नहीं चाहिए, बल्कि उनका डटकर सामना करना ही सच्ची सफलता की कुंजी है।
रुक्मिणी विहार स्थित नव-निर्मित जीवनदीप आश्रम के उद्घाटन अवसर पर कई गणमान्य हस्तियां मौजूद रहीं। इस दौरान भागवत ने कहा कि आश्रम केवल आध्यात्मिक साधना के केंद्र ही नहीं होते, बल्कि वे व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक और नैतिक विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने आश्रमों को समाज के लिए ऊर्जा और दिशा देने वाला स्थान बताया।
अपने संबोधन में उन्होंने जीवन के उतार-चढ़ाव का उल्लेख करते हुए कहा, “जीवन के थपेड़ों से लड़ना है, हारना नहीं।” उनका कहना था कि कठिन परिस्थितियां ही व्यक्ति को मजबूत बनाती हैं और इन्हीं से सीख लेकर आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने युवाओं से धैर्य और संयम बनाए रखने की अपील की।
वैश्विक परिदृश्य पर बात करते हुए मोहन भागवत ने विशेष रूप से पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि युद्ध और टकराव से किसी का भला नहीं होता, बल्कि इससे पूरी दुनिया को नुकसान उठाना पड़ता है। बदले की भावना से किए जा रहे कार्यों को उन्होंने गलत बताते हुए शांति और सौहार्द का संदेश दिया।
संघ प्रमुख ने समाज की जिम्मेदारी पर जोर देते हुए धर्मांतरण जैसे मुद्दों पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि यह केवल कानून का विषय नहीं है, बल्कि समाज को भी जागरूक होकर अपनी भूमिका निभानी होगी। साथ ही उन्होंने अवैध घुसपैठ और बिना अनुमति रोजगार करने वाले विदेशियों के प्रति सतर्क रहने की आवश्यकता बताई।
समारोह के दौरान उपस्थित लोगों से उन्होंने आह्वान किया कि वे धर्म, कर्तव्य और सामाजिक जिम्मेदारी के मार्ग पर चलें। उनका कहना था कि यदि समाज संगठित और जागरूक रहेगा, तो न केवल देश बल्कि पूरी दुनिया के सामने एक सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत किया जा सकता है।


