बलूचिस्तान: लोगों के जबरन गायब होने का मुद्दा एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। हाल ही में कुछ लापता लोगों की वापसी से जहां थोड़ी राहत मिली है, वहीं नए मामलों ने इलाके में भय और अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया है। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर मानवाधिकारों की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पांच लापता लोग सुरक्षित अपने घर लौट आए हैं। इनकी वापसी को परिवारों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, जो लंबे समय से अपने प्रियजनों के इंतजार में थे। हालांकि, इन मामलों में हिरासत और रिहाई की परिस्थितियां अब भी स्पष्ट नहीं हैं।
वापस लौटने वालों में पंजगुर जिले की फातिमा भी शामिल हैं, जिन्हें 13 जनवरी 2026 को हिरासत में लिया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्हें बाद में हब चौकी के पास छोड़ दिया गया। उनके परिवार ने उनकी सुरक्षित वापसी पर राहत जताई, लेकिन गिरफ्तारी के कारणों को लेकर अब भी सवाल बने हुए हैं।
इसी तरह ग्वादर के जईम और कंबर को भी रिहा कर दिया गया है। दोनों के परिजनों ने उनकी वापसी पर खुशी जताई, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह की घटनाएं आम लोगों के बीच असुरक्षा की भावना को बढ़ा रही हैं।
मस्तुंग के सईद अहमद, जो 11 दिसंबर 2025 से लापता थे, क्वेटा में पाए गए। उनके अचानक गायब होने और फिर मिलने की घटना ने स्थानीय लोगों को हैरान कर दिया है। वहीं केच जिले के दिलदार, जो अगस्त 2025 से लापता थे, उन्हें भी आखिरकार तुरबत में देखा गया।
इन सभी मामलों में एक समान बात यह है कि हिरासत में लिए जाने और रिहाई की प्रक्रिया को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। इससे लोगों के मन में कई तरह की आशंकाएं पैदा हो रही हैं और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
दूसरी ओर, नए लापता होने के मामलों ने चिंता को और गहरा कर दिया है। कराची से 26 वर्षीय मेडिकल छात्र इमरान बलूच को 20 दिसंबर 2025 को हिरासत में लिया गया था, जिसके बाद से उनका कोई पता नहीं चल पाया है। उनके परिवार का कहना है कि उन्हें अब तक किसी भी आधिकारिक एजेंसी से कोई जानकारी नहीं मिली है।
इमरान बलूच मूल रूप से बलूचिस्तान के निवासी हैं और उनकी गुमशुदगी ने छात्र समुदाय में भी बेचैनी बढ़ा दी है। परिजनों और साथियों ने उनकी सुरक्षित वापसी की मांग की है और मामले की निष्पक्ष जांच की अपील की है।
एक अन्य मामले में लसबेला यूनिवर्सिटी के छात्र हसीब बलूच को 4 फरवरी 2026 को ग्वादर के पसनी इलाके से हिरासत में लिया गया। इसके बाद से उनका भी कोई सुराग नहीं मिल पाया है। इस घटना ने छात्रों और उनके परिवारों में डर का माहौल बना दिया है।
हसीब के परिवार का आरोप है कि प्रशासन इस मामले में कोई ठोस जानकारी नहीं दे रहा है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से जवाबदेही तय करने और जल्द से जल्द उनके बेटे को खोजने की मांग की है।
मानवाधिकार संगठनों ने इन घटनाओं को लेकर पाकिस्तान सरकार की आलोचना की है। उनका कहना है कि जबरन गायब किए जाने के मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही की भारी कमी है, जो अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों के खिलाफ है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं न केवल प्रभावित परिवारों को मानसिक और सामाजिक रूप से नुकसान पहुंचाती हैं, बल्कि पूरे क्षेत्र में अस्थिरता और अविश्वास का माहौल भी पैदा करती हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों से सरकार और सुरक्षा एजेंसियों के प्रति भरोसा कमजोर होता जा रहा है। वे चाहते हैं कि इन मामलों की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
बलूचिस्तान में जबरन गायब होने के मामलों का मुद्दा लंबे समय से उठता रहा है, लेकिन हालिया घटनाओं ने इसे फिर से केंद्र में ला दिया है। अब देखना होगा कि प्रशासन इन मामलों पर किस तरह प्रतिक्रिया देता है और क्या पीड़ित परिवारों को न्याय मिल पाता है या नहीं।


