वॉशिंगटन। पश्चिम एशिया में ईरान के खिलाफ जारी युद्ध के 17वें दिन अमेरिका की रणनीति पर नए सवाल खड़े होने लगे हैं। इस बीच डोनाल्ड ट्रंप ने स्वीकार किया है कि मौजूदा हालात में अमेरिका को अपेक्षित अंतरराष्ट्रीय समर्थन नहीं मिल पा रहा है और अब इस संकट का राजनीतिक समाधान तलाशने की जरूरत महसूस की जा रही है।
व्हाइट हाउस में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ट्रंप ने कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही को फिर से सामान्य बनाने के लिए दुनिया के कई देश आगे आने को लेकर उत्साहित नहीं दिख रहे हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने वर्षों तक कई देशों की सुरक्षा में मदद की और उन्हें बाहरी खतरों से बचाया, लेकिन मौजूदा संकट में वही देश अपेक्षित सहयोग देने में पीछे हटते नजर आ रहे हैं।
ट्रंप ने कहा कि कुछ देशों ने इस दिशा में कदम बढ़ाने की बात जरूर कही है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक सहयोग की कमी साफ दिखाई दे रही है। उन्होंने संकेत दिया कि यदि जल्द कोई समाधान नहीं निकला तो इससे वैश्विक समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ सकता है।
गौरतलब है कि होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। इस मार्ग से वैश्विक स्तर पर बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और गैस की आपूर्ति होती है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण यहां से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों और तेल टैंकरों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं लगातार बढ़ रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस समुद्री मार्ग में असुरक्षा का माहौल बना रहता है तो इसका असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर पड़ सकता है और कई देशों की ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। यही कारण है कि कई देश इस क्षेत्र की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार ट्रंप द्वारा राजनीतिक समाधान की बात करना इस बात का संकेत है कि लंबे समय तक चलने वाले इस संघर्ष को केवल सैन्य कार्रवाई के जरिए खत्म करना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में कूटनीतिक प्रयास तेज होने की संभावना जताई जा रही है।


