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Saturday, March 14, 2026

भारत से लौट रहे ईरान के युद्धपोत पर हमला, 104 नौसैनिकों की मौत;

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तेल अवीव/तेहरान: मध्य पूर्व में जारी युद्ध अब पंद्रहवें दिन में प्रवेश कर चुका है और स्थिति लगातार तनावपूर्ण बनी हुई है। ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच लड़ाई के बीच क्षेत्र के देशों में भय और असुरक्षा का माहौल है। ईरान की सेना ने हिंद महासागर में अपने युद्धपोत पर हुए अमेरिकी हमले को गंभीर मामला बताया है। ईरान के सैन्य प्रमुख अमीर हातमी ने कहा है कि यह हमला भूलने योग्य नहीं है और इसका उचित जवाब अवश्य दिया जाएगा। उनका यह भी कहना है कि डेना युद्धपोत और उसके जवानों का बलिदान हमेशा ईरान की नौसेना के इतिहास में याद रखा जाएगा और देश अपनी समुद्री सीमाओं की सुरक्षा को और मजबूत करेगा।

चार मार्च को हिंद महासागर में श्रीलंका के शहर गाले के पास ईरानी युद्धपोत आईआरआईएस डेना पर हमला किया गया। इस हमले में एक सौ चार नौसैनिक शहीद हो गए। ईरान के अनुसार यह जहाज भारत में हुए बहुराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यास मिलन २०२६ से लौट रहा था और उस समय किसी युद्ध या लड़ाई में शामिल नहीं था।

ईरान की सरकारी समाचार संस्था इस्लामिक रिपब्लिक न्यूज़ एजेंसी ने यह भी बताया कि डेना युद्धपोत पर हमला न केवल नौसैनिक बल की हानि का कारण बना बल्कि यह ईरानी समुद्री सामर्थ्य और राष्ट्रीय गौरव पर भी चोट है। अमीर हातमी ने कहा कि ईरान अपनी नौसेना को और अधिक सशक्त बनाएगा और समुद्री मार्गों की सुरक्षा के लिए हर आवश्यक कदम उठाएगा।

इस बीच, ईरान ने महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही पर नजर रखना और नियंत्रण कड़ा कर दिया है। यह मार्ग विश्व के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि विश्व के कुल तेल आपूर्ति का लगभग बीस प्रतिशत इसी मार्ग से होकर गुजरता है। ईरानी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों को विशेष सुरक्षा उपाय अपनाने होंगे।

युद्ध का असर केवल सैन्य क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में चिंता बढ़ गई है। कई देशों ने तेल और गैस आपूर्ति में संभावित बाधा को देखते हुए अपने आपातकालीन भंडार को सक्रिय करने की तैयारी शुरू कर दी है। जापान ने अपने आपातकालीन तेल भंडार खोलने का निर्णय लिया है। टोक्यो और अन्य क्षेत्रों में ईंधन की बढ़ती कीमतों का असर मछुआरों, समुद्री व्यापार और दैनिक जीवन पर स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि ईरान अब युद्ध में कमजोर पड़ चुका है और समझौता करना चाहता है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ कई सफल सैन्य कार्रवाइयां की हैं। वहीं अमेरिका ने मध्य पूर्व में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाते हुए लगभग ढाई हजार समुद्री सैनिक और युद्धपोत यूएसएस त्रिपोली को क्षेत्र की ओर भेजा है।

इजराइल की सेना ने भी लेबनान में हिजबुल्लाह के लड़ाकों पर हवाई हमला किया और क्षेत्र में अपनी सक्रियता बढ़ा दी। ईरान ने अमेरिका और इजराइल को चेतावनी दी है कि अगर उनके हमले जारी रहे तो इसका जवाब अवश्य मिलेगा। ईरानी सेना के प्रवक्ता अबोलफजल शेकरची ने मिडिल ईस्ट के देशों से कहा कि वे अमेरिका और इजराइल के खिलाफ एकजुट होकर खड़े हों और अमेरिका पर भरोसा न करें।

युद्ध के कारण वैश्विक पर्यटन और यात्रा क्षेत्र भी भारी नुकसान झेल रहा है। विश्व यात्रा एवं पर्यटन परिषद का अनुमान है कि मध्य पूर्व में जारी युद्ध के कारण दुनिया भर के टूर और ट्रैवल सेक्टर को प्रतिदिन हजारों करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। भारतीय पर्यटक अब थाईलैंड, मलेशिया और जापान जैसे देशों की जगह घरेलू पर्यटन स्थलों को प्राथमिकता दे रहे हैं।

वैश्विक विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह संघर्ष लंबे समय तक चला, तो इसका प्रभाव केवल आर्थिक ही नहीं बल्कि भू-राजनीतिक क्षेत्र में भी दिखाई देगा। तेल और गैस की आपूर्ति में बाधा से देशों की ऊर्जा सुरक्षा पर संकट बढ़ेगा। इस बीच फ्रांस और इटली ने ईरान से बातचीत शुरू की है ताकि उनके जहाज बिना खतरे के होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर सकें।

युद्ध की यह भयावह स्थिति यह सिखाती है कि “जहाँ क्रोध और हिंसा बढ़ती है, वहाँ शांति और समझौते का महत्व और भी बड़ा हो जाता है।”

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