फर्रुखाबाद। नवाबगंज नगर पंचायत में मुख्यमंत्री नगर सृजन योजना के तहत करीब 39 लाख रुपये की लागत से बनाए जा रहे पार्क की बाउंड्रीवाल एक माह के भीतर ही ढह जाने के बाद अब उसी स्थान पर दोबारा निर्माण शुरू कर दिया गया है। इस मामले को लेकर नगर पंचायत की कार्यशैली और निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हैरानी की बात यह है कि दीवार गिरने के बाद जांच की बात कही गई थी, लेकिन जांच कमेटी के गठन को लेकर अब तक कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आ सकी है।
जानकारी के अनुसार नगर पंचायत नवाबगंज ने मोहम्मदाबाद मार्ग पर जनवरी माह में एक पार्क के निर्माण का कार्य शुरू कराया था। इस परियोजना की कुल लागत लगभग 39 लाख रुपये बताई जा रही है। ठेकेदार द्वारा जनवरी के अंतिम सप्ताह तक पार्क की बाउंड्रीवाल का निर्माण कर दिया गया था, लेकिन निर्माण के लगभग एक महीने बाद ही 20 फरवरी को बाउंड्रीवाल का एक हिस्सा अचानक ढह गया। दीवार गिरने की घटना से स्थानीय लोगों में नाराजगी फैल गई और निर्माण कार्य में भारी लापरवाही की चर्चा होने लगी।
सूत्रों के अनुसार जांच में यह बात सामने आई कि ठेकेदार ने बाउंड्रीवाल की मजबूत नींव खोदने के बजाय जमीन की सतह पर ही पिलर खड़े कर दिए थे और उसी आधार पर दीवार खड़ी कर दी गई थी। कमजोर आधार के कारण दीवार अधिक समय तक टिक नहीं सकी और ढह गई। इससे सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका भी जताई जा रही है। बताया गया है कि नगर पंचायत द्वारा ठेकेदार को करीब 12 लाख रुपये का भुगतान भी किया जा चुका था।
दीवार गिरने के बाद नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी (ईओ) और अपर जिलाधिकारी (एडीएम) द्वारा जांच कमेटी गठित कर पूरे मामले की जांच कराने का आश्वासन दिया गया था। हालांकि जब इस संबंध में ईओ से जानकारी मांगी गई तो वह यह बताने में असमर्थ रहे कि जांच कमेटी में किन-किन अधिकारियों को शामिल किया गया है। इस स्थिति ने ठेकेदार और संबंधित अधिकारियों की मिलीभगत की आशंका को और बल दे दिया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बिना किसी ठोस जांच और कार्रवाई के उसी कार्यदायी संस्था द्वारा दोबारा उसी स्थान पर बाउंड्रीवाल का निर्माण शुरू कर दिया गया है। आरोप यह भी है कि पहले की तरह ही बिना उचित नींव के निर्माण कार्य कराया जा रहा है।
इसके अलावा एक और बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि जिस जमीन पर यह पार्क और बाउंड्रीवाल बनाई जा रही है, वह जमीन चरागाह (चारागाह) की भूमि बताई जा रही है। शासनादेश के अनुसार चरागाह की भूमि पर किसी भी प्रकार का स्थायी निर्माण कराना कानूनी रूप से प्रतिबंधित है। इसके बावजूद संबंधित अधिकारी इस मामले में गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं।
नगर पंचायत अध्यक्ष अनिल कुमार राजपूत का कहना है कि निर्माण कार्य अपर जिलाधिकारी के निर्देश पर कराया जा रहा है। वहीं स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है, ताकि सरकारी धन की बर्बादी और लापरवाही पर अंकुश लगाया जा सके।
एक माह में गिरी 39 लाख की पार्क बाउंड्रीवाल, अब बिना जांच दोबारा निर्माण शुरू—अधिकारियों की कार्यशैली पर उठे सवाल


