शमशाबाद, फर्रुखाबाद। रंगों के पर्व होली को लेकर नगर एवं ग्रामीण क्षेत्रों में जबरदस्त उत्साह देखा गया। मंगलवार को बाजारों में खरीददारों की भारी भीड़ उमड़ी। किसी ने जमकर खरीददारी की तो किसी ने सीमित बजट में केवल खानापूर्ति की। परचून की दुकानों से लेकर मिठाई और रंग-गुलाल के प्रतिष्ठानों तक ग्राहकों की चहल-पहल दिनभर बनी रही।
घर-घर पकवानों की तैयारी
हिंदू समाज में हर्षोल्लास के साथ मनाए जाने वाले होली पर्व की तैयारियां कई दिनों से चल रही थीं। शहर से लेकर गांव तक लोगों ने घर आए मेहमानों की खातिरदारी के लिए विशेष इंतजाम किए। घर-घर में कचौरी, पापड़, गुजिया और तरह-तरह के पकवान बनाए जा रहे हैं। महिलाएं एवं युवतियां मिठाइयों की तैयारी में जुटी रहीं, वहीं बाजार से भी मिष्ठान और सूखे मेवे की खरीददारी की गई ताकि मेहमानों का स्वागत पूरे उत्साह से किया जा सके।
रंग-गुलाल की दुकानों पर भीड़
मंगलवार को शमशाबाद बाजार में अबीर, गुलाल और रंगों की सजी दुकानों पर बच्चों, युवाओं और महिलाओं की खासी भीड़ देखी गई। रंग-बिरंगे पैकेट, पिचकारियां और आकर्षक खिलौनों ने बच्चों को खूब लुभाया। नगर के अलावा कस्बा फैजबाग, रोशनाबाद, चिलसरा, रामापुर, शकरुल्लापुर और मंझना क्षेत्रों में भी अच्छी-खासी खरीददारी होती देखी गई। लोगों ने अपनी आवश्यकतानुसार सामान खरीदा, हालांकि कई परिवारों ने बढ़ती महंगाई को देखते हुए सीमित खर्च ही किया।
पर्व की तिथि को लेकर असमंजस
देश में लगने वाले ग्रहण को लेकर कुछ लोगों में असमंजस की स्थिति भी बनी रही। त्योहार किस दिन मनाया जाए, इसे लेकर कई लोग विद्वानों से परामर्श करते नजर आए। अधिकांश लोगों ने मंदिरों में पूजा-अर्चना कर सुख-शांति की कामना की, ताकि होली का पर्व आनंदपूर्वक मनाया जा सके।
आलू की मंदी ने फीकी की किसानों की होली
जहां एक ओर बाजारों में रौनक रही, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में आलू किसान मायूस नजर आए। इस वर्ष आलू की फसल तो अच्छी हुई, लेकिन मंडी में भारी मंदी के चलते किसानों को लागत भी निकलना मुश्किल हो रहा है।
किसानों ने खाद, बीज और सिंचाई पर हजारों-लाखों रुपये खर्च किए थे। उन्हें उम्मीद थी कि इस बार अच्छी आमदनी होगी और होली खुशहाली लेकर आएगी। लेकिन जब फसल मंडी पहुंची तो दाम इतने कम मिले कि भाड़ा निकालना भी कठिन हो गया।
कुछ किसान नजदीकी शीतगृहों में आलू भंडारित कर रहे हैं, लेकिन वहां भी जगह की कमी और बढ़ते खर्च को लेकर चिंता बनी हुई है। कई किसानों का कहना है कि खेतों में अभी भी फसल खड़ी है, जिसकी खुदाई होली के बाद की जाएगी। उन्हें आशंका है कि यदि बाजार भाव नहीं सुधरे तो भविष्य में भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
बेमन से हो रही खरीददारी
ग्रामीण इलाकों में कई किसान परिवार होली की खरीददारी तो कर रहे हैं, लेकिन उनके चेहरों पर खुशी की जगह चिंता साफ झलक रही है। उनका कहना है कि जिन सपनों के साथ आलू की खेती की थी, वही फसल अब उन्हें “खून के आंसू” रुला रही है।


