चेन्नई। तमिलनाडु में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) और उसकी प्रमुख सहयोगी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे को लेकर बातचीत अंतिम दौर में पहुंचकर अटक गई है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक सीट शेयरिंग पर सहमति बनाने की तय समय सीमा मंगलवार को समाप्त हो रही है, लेकिन अब तक कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है। ऐसे में दोनों दलों के गठबंधन के भविष्य को लेकर राजनीतिक हलकों में अटकलें तेज हो गई हैं।
सूत्रों का कहना है कि डीएमके नेतृत्व ने कांग्रेस से निर्धारित समय के भीतर अपनी अंतिम स्थिति स्पष्ट करने को कहा था, ताकि गठबंधन की रूपरेखा तय कर चुनाव प्रचार की रणनीति पर तेजी से काम शुरू किया जा सके। डीएमके चाहती है कि सीटों का बंटवारा जल्द अंतिम रूप ले, जिससे उम्मीदवारों की घोषणा और क्षेत्रीय स्तर पर संगठनात्मक तैयारी समय पर हो सके। हालांकि, कांग्रेस की बढ़ी हुई मांग के कारण वार्ता में गतिरोध बना हुआ है।
वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव में डीएमके के नेतृत्व वाले गठबंधन के तहत कांग्रेस को 25 सीटें आवंटित की गई थीं। इस बार भी डीएमके कथित तौर पर उसी फॉर्मूले को बरकरार रखते हुए कांग्रेस को 25 सीटें देने के पक्ष में है। इसके साथ ही व्यापक गठबंधन समझ के तहत कांग्रेस को एक राज्यसभा सीट देने का प्रस्ताव भी रखा गया है। लेकिन कांग्रेस इस बार कम से कम 35 विधानसभा सीटों की मांग पर अड़ी बताई जा रही है। पार्टी का तर्क है कि राज्य में उसकी संगठनात्मक मौजूदगी और पिछली चुनावी भागीदारी को देखते हुए उसे अधिक प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।
बातचीत में आई इस रुकावट के पीछे एक बड़ा कारण गठबंधन में शामिल अन्य दलों की दावेदारी भी मानी जा रही है। डीएमके के लिए सभी सहयोगियों के बीच संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण हो गया है। नई पार्टियों की एंट्री और क्षेत्रीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए सीटों का वितरण रणनीतिक रूप से तय करना सत्तारूढ़ दल की प्राथमिकता है। ऐसे में कांग्रेस का कोटा बढ़ाना डीएमके के लिए आसान नहीं माना जा रहा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि कांग्रेस की 35 सीटों की मांग पर समझौता नहीं होता है तो वह अपनी रणनीति पर पुनर्विचार कर सकती है, हालांकि पार्टी की ओर से इस बारे में कोई औपचारिक संकेत नहीं दिया गया है। फिलहाल दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व के बीच बातचीत जारी है और अंतिम फैसला आने तक स्थिति अनिश्चित बनी हुई है।
समय सीमा समाप्त होने के साथ अब सबकी नजरें डीएमके और कांग्रेस नेतृत्व पर टिकी हैं। यदि समझौता हो जाता है तो गठबंधन मजबूती के साथ चुनाव मैदान में उतरेगा, लेकिन यदि गतिरोध गहराता है तो तमिलनाडु की राजनीति में नए समीकरण बन सकते हैं, जिसका असर आगामी विधानसभा चुनाव के परिणामों पर भी पड़ सकता है।
सीट शेयरिंग पर डीएमके-कांग्रेस में पेंच, समय सीमा खत्म; गठबंधन के भविष्य पर अटकलें तेज


