– सरकार ने स्पष्ट कहा — बिना सक्रिय सिम कार्ड वाला नंबर व्हाट्सप्प में नहीं चलेगा
नई दिल्ली। टेलीकॉम नियमों में बड़ा बदलाव किया गया है। केंद्र सरकार ने घोषणा की है कि 1 मार्च से सिम-बाइंडिंग (सिम बिंडिंग ) नियम लागू हो जाएगा। इसका सीधा मतलब यह है कि यदि आपके व्हाट्सप्प अकाउंट में जो मोबाइल नंबर इस्तेमाल हो रहा है, तो उसी नंबर की फिजिकल सिम कार्ड आपके फोन में लगी और सक्रिय होनी चाहिए।
संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने स्पष्ट किया है कि इस नियम के लिए कोई ढील नहीं दी जाएगी और इसे नियत तारीख से लागू किया जाएगा। सरकार का कहना है कि यह कदम डेटा सुरक्षा और फ्रॉड रोकने के उद्देश्य से उठाया गया है, ताकि किसी भी खाते को बिना वास्तविक सिम कार्ड के इस्तेमाल नहीं किया जा सके।
सिम-बाइंडिंग नियम क्या है?
सरकार के अनुसार, सिम-बाइंडिंग का मतलब है कि WhatsApp जैसे मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर आपका अकाउंट उसी मोबाइल नंबर से जुड़ेगा, जो फिजिकल सिम कार्ड के रूप में आपके डिवाइस में मौजूद और सक्रिय हो।
अब केवल नंबर की “डिजिटल सत्यापन” ही काफी नहीं रहेगा — असली सिम वाला फोन में सक्रिय होना जरूरी होगा।
संचार मंत्रालय का कहना है कि यह नियम धोखाधड़ी, फेक अकाउंट, पहचान के गलत इस्तेमाल और साइबर अपराधों को रोकने में मदद करेगा। इससे यूजर्स की सुरक्षा मजबूत होगी और डिजिटल पहचान और भी विश्वसनीय बनेगी।
यूजर्स को क्या करना होगा?
यदि आपने व्हाट्सप्प किसी नंबर से बनाया है जो आपके फोन में आज मौजूद नहीं है, तो 1 मार्च के बाद वह अकाउंट सक्रिय नहीं रह सकता है। इससे पहले कि नियम लागू हो, यूजर्स को यह सुनिश्चित करना होगा कि वही नंबर आपके फोन में फिजिकल सिम के रूप में मौजूद और सक्रिय है, जिससे आपका व्हाट्सप्प चल रहा है।
कई यूजर्स के लिए यह बदलाव जरूरी अपडेट की तरह है, लेकिन कुछ लोगों को परेशानी भी हो सकती है, खासकर उन लोगों को जिनके पास डुअल-SIM फोन या एक पुराना नंबर है जो अब इस्तेमाल में नहीं है। टेक विशेषज्ञों के अनुसार यह नियम साइबर सुरक्षा के लिहाज़ से एक मजबूत कदम है, लेकिन इससे व्हाट्सप्प यूजर के अनुभव में बदलाव जरूर आएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि
यह कदम फ्रॉड और फेक अकाउंट्स को कम कर सकता है। दूसरी तरफ, कुछ पुराने नंबरों को दोबारा सक्रिय करने या सिम स्विच करने की प्रक्रिया लोगों के लिए चुनौती बन सकती है।


