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Wednesday, February 25, 2026

रिश्तों में दरार, दबाव और पारिवारिक कलह: कैसे बढ़ता गया पिता-पुत्र के बीच तनाव

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लखनऊ| राजधानी में शराब कारोबारी मानवेंद्र सिंह की उनके बेटे अक्षत प्रताप सिंह के हाथों हुई हत्या के बाद अब मामला केवल एक आपराधिक घटना तक सीमित नहीं रह गया है। शहर में बच्चों की परवरिश, पारिवारिक संवाद और अभिभावकीय दबाव को लेकर व्यापक बहस छिड़ गई है। पड़ोसियों और परिचितों के बीच चर्चा है कि पिता-पुत्र के रिश्तों में दरार अचानक नहीं आई, बल्कि पिछले कई वर्षों से तनाव पनप रहा था।
परिवार के करीबी रिश्तेदार एसएस भदौरिया के अनुसार वर्ष 2017 में अक्षत की मां ने पारिवारिक कलह के चलते जहर खाकर आत्महत्या कर ली थी। बताया जाता है कि अक्षत अपनी मां की मौत के लिए पिता को जिम्मेदार मानता था। इस घटना के बाद से उसके मन में पिता के प्रति गहरी नाराजगी और दूरी पैदा हो गई थी। यही दूरी समय के साथ नफरत में बदलती चली गई।
स्थानीय लोगों में यह चर्चा भी रही कि मानवेंद्र की एक महिला से नजदीकियां थीं। बताया जाता है कि वह अक्सर देर रात तक पार्टियों में रहते और घर देर से लौटते थे। इस जीवनशैली को लेकर भी घर में तनाव बना रहता था। कुछ लोगों का कहना है कि हत्या से दो दिन पहले एक महिला का फोन आने पर मानवेंद्र का विवाद हुआ था, जिसकी जानकारी अक्षत को भी थी। इसे लेकर भी पिता-पुत्र के बीच कई बार कहासुनी हुई थी। हालांकि पुलिस अभी इन तथ्यों की पुष्टि जांच के आधार पर कर रही है।
दूसरी ओर, पढ़ाई को लेकर भी विवाद गहराता गया। अक्षत पिता के कहने पर नीट की कोचिंग तो कर रहा था, लेकिन वह डॉक्टर नहीं बनना चाहता था। पूछताछ में उसने पुलिस को बताया कि उस पर लगातार परीक्षा पास करने का दबाव बनाया जाता था। तीन वर्ष पहले वह इसी दबाव में घर छोड़कर चला गया था और छह पन्नों का एक नोट भी छोड़ा था।
परिवार के लोगों के अनुसार तीन साल पहले मानवेंद्र ने बेटे और बेटी के खाते में पांच-पांच लाख रुपये जमा किए थे। इसके बाद अक्षत के खर्च बढ़ गए थे। आदतों में सुधार न होने पर मानवेंद्र ने उसे स्वयं कमाकर खर्च चलाने की बात कही थी। बताया जाता है कि अक्षत रिसॉर्ट और रेस्टोरेंट का कारोबार शुरू करना चाहता था, लेकिन पिता ने इसकी अनुमति नहीं दी। इसी बात को लेकर भी दोनों के बीच मतभेद बढ़ते गए।
करीबी रिश्तेदारों का कहना है कि परिवार को पिता-पुत्र के बीच बढ़ती दूरी की जानकारी थी, लेकिन किसी ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। आज यह घटना समाज के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा कर रही है—क्या संवाद की कमी, भावनात्मक दूरी और अत्यधिक दबाव रिश्तों को इस कदर तोड़ सकते हैं?
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गहन जांच कर रही है और सभी पहलुओं को जोड़कर घटना की पृष्ठभूमि स्पष्ट करने में जुटी है। वहीं, यह हृदयविदारक घटना अभिभावकों और युवाओं के रिश्तों पर गंभीर चिंतन की आवश्यकता भी महसूस करा रही है।

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