बच्चों की पढ़ाई प्रभावित, बीएसए ने कहा, नियम विरुद्ध, होगी जांच
फर्रुखाबाद| प्रदेश नेतृत्व के आह्वान पर शिक्षकों द्वारा काली पट्टी बांधकर टेट आदेश के विरोध में प्रदर्शन किए जाने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। जहां एक ओर शिक्षक संगठन इसे अपने अधिकारों की लड़ाई बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर यह प्रदर्शन विद्यालय समय में किए जाने से शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जब बच्चों को कक्षाओं में पढ़ाया जाना चाहिए था, उस समय कई शिक्षक शिक्षण कार्य छोड़कर बीआरसी केंद्रों पर एकत्र होकर विरोध प्रदर्शन करते नजर आए।
शिक्षक संगठनों के पदाधिकारियों अभिनेश मिश्रा (जिला अध्यक्ष, पूर्व माध्यमिक जूनियर हाई स्कूल शिक्षक संघ), देवेश यादव (वरिष्ठ जिला उपाध्यक्ष, पूर्व माध्यमिक शिक्षक संघ), डॉ. वीरेंद्र त्रिवेदी (जिला महामंत्री), अशोक कुमार सिंह (जिला मीडिया प्रभारी), राजीव यादव (जिला उपाध्यक्ष), केपी यादव, विष्णु दयाल, रामेश्वर सिंह, गरिमा राठौर, बबीता सिंह, शोभा कुमारी, गीता सिंह, सुमन दीक्षित, फरहा हसनैन, कमल सिंह सहित अन्य शिक्षकों की मौजूदगी में यह प्रदर्शन किया गया।शिक्षकों का कहना है कि 50 वर्ष की आयु में टेट जैसी परीक्षा की तैयारी करना व्यावहारिक नहीं है और इससे शिक्षण कार्य प्रभावित होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगें नहीं मानी गईं तो 26 तारीख को जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय से जिलाधिकारी कार्यालय तक धरना-प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपा जाएगा, और आवश्यकता पड़ी तो प्रदेश नेतृत्व के आह्वान पर दिल्ली कूच भी किया जाएगा।
हालांकि इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि क्या बच्चों की पढ़ाई छोड़कर प्रदर्शन करना उचित है, विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्र उस समय शिक्षकों की प्रतीक्षा करते रहे, जबकि शिक्षक बीआरसी पर विरोध दर्ज करा रहे थे। अभिभावकों में भी इसको लेकर नाराजगी देखी जा रही है।
इस संबंध में विश्वनाथ प्रताप सिंह, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, फर्रुखाबाद ने स्पष्ट कहा कि “स्कूल समय में बीआरसी पहुंचकर प्रदर्शन करना नियम विरुद्ध है। इस मामले की जांच कराई जाएगी और दोषी पाए जाने पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।”
शिक्षा व्यवस्था पहले ही विभिन्न चुनौतियों से जूझ रही है। ऐसे में यदि शिक्षक स्वयं शिक्षण समय में विरोध प्रदर्शन करेंगे तो इसका सीधा असर विद्यार्थियों के भविष्य पर पड़ेगा। अब देखना यह होगा कि प्रशासनिक जांच के बाद क्या कदम उठाए जाते हैं और क्या शिक्षक संगठन अपने आंदोलन की रणनीति में बदलाव करते हैं या संघर्ष और तेज होगा।





