कुपोषण, जल संरक्षण और ग्रामीण विकास में नवाचार से बनाई अलग पहचान
लखनऊ। भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी डॉ. हीरा लाल ने अपने प्रशासनिक कार्यकाल में जिस तरह जनसहभागिता को केंद्र में रखकर विकास मॉडल तैयार किया, उसने उन्हें प्रदेश ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बना दिया है।
ग्रामीण क्षेत्रों में कुपोषण की समस्या से निपटने के लिए उन्होंने स्वास्थ्य विभाग, आंगनबाड़ी और स्वयंसेवी संगठनों के साथ समन्वय स्थापित किया। “पोषण पर संवाद” जैसे अभियानों के माध्यम से माताओं और बच्चों को जागरूक करने का प्रयास किया गया।
डॉ. हीरा लाल ने जल संकट से जूझते क्षेत्रों में तालाबों के पुनर्जीवन और वर्षा जल संचयन को जनांदोलन का रूप दिया। स्थानीय ग्रामीणों की भागीदारी से कई सूखे जलस्रोतों को पुनर्जीवित किया गया। इससे खेती और पेयजल व्यवस्था में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिला।
डिजिटल और पारदर्शी प्रशासन
उन्होंने सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से जनता से सीधे संवाद की परंपरा को मजबूत किया। शिकायत निवारण की प्रक्रिया को सरल बनाकर आम नागरिकों का भरोसा जीता।
स्वयं सहायता समूहों को प्रोत्साहित कर ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाए गए।
विशेषज्ञों का मानना है कि डॉ. हीरा लाल का प्रशासनिक मॉडल “नीति से ज़्यादा व्यवहार” पर आधारित है, जहां अधिकारी स्वयं जमीनी स्तर पर पहुंचकर समस्याओं का समाधान तलाशते हैं।





