कानपुर
भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार ढांचा समझौते की रूपरेखा जारी होने से निर्यातकों को बड़ी राहत मिली है। अमेरिका ने भारत पर लगाया गया 50 प्रतिशत टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है। सात फरवरी के बाद भेजे जाने वाले निर्यात ऑर्डरों पर नई दर लागू होगी। इससे अमेरिका को होने वाला निर्यात, जो अगस्त में टैरिफ बढ़ने के बाद लगभग ठप हो गया था, अब फिर से गति पकड़ने की उम्मीद है।
नई व्यवस्था के तहत चमड़ा उत्पादों पर कुल टैरिफ करीब 27–28 प्रतिशत और टेक्सटाइल पर लगभग 29 प्रतिशत रहेगा। इसके बावजूद निर्यातकों का कहना है कि टैरिफ का सबसे बड़ा अवरोध दूर हो गया है। चीन, वियतनाम और बांग्लादेश की तुलना में भारतीय उत्पाद अब अमेरिकी बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी होंगे, जिससे मांग बढ़ने की संभावना है।
शहर से चमड़ा, टेक्सटाइल, प्लास्टिक, इंजीनियरिंग और सब्जी मसाला जैसे उत्पादों का निर्यात किया जाता है। बीते वर्ष करीब 2500 करोड़ रुपये का निर्यात हुआ था, जिसमें अकेले चमड़ा उद्योग की हिस्सेदारी 1200 से 1300 करोड़ रुपये रही। व्यापार समझौते के बाद निर्यातकों में उत्साह है और उन्हें भरोसा है कि रुका हुआ कारोबार फिर से पटरी पर आएगा।
निर्यातकों का मानना है कि यह समझौता भविष्य के द्विपक्षीय व्यापार समझौते की दिशा में एक अहम कदम है, जिसमें आगे चलकर शुल्क और कम हो सकते हैं। इससे श्रम आधारित उद्योगों जैसे चमड़ा, टेक्सटाइल और इंजीनियरिंग उत्पादों को और लाभ मिलेगा। अमेरिका जैसे बड़े बाजार के दोबारा खुलने से भारतीय उत्पादों की पहुंच बढ़ेगी और निर्यात को नई ऊर्जा मिलेगी।


