कोर्ट के स्थगन आदेश के बावजूद बिक्री प्रशासन की भूमिका सवालों के घेरे में, भोले वाले लोगों को गुमराह कर बेचे जा रहे अवैध प्लांट
कमालगंज/फर्रुखाबाद| तहसील सदर क्षेत्र की ग्राम पंचायत महरुपुर रावी, जो नगर पंचायत कमालगंज से सटी हुई है, वहां गाटा संख्या 235 पर खुलेआम नियमों को दरकिनार कर कृषि भूमि पर अवैध प्लाटिंग किए जाने का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि जिम्मेदार विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से यह पूरा खेल चल रहा है, जबकि उक्त भूमि न्यायालय में विचाराधीन है और इस पर स्पष्ट रूप से स्थगन आदेश लागू है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, गाटा संख्या 235 पर की जा रही प्लाटिंग राजीव अग्रवाल द्वारा कराई जा रही है। हैरानी की बात यह है कि इस कथित अवैध प्लाटिंग को सुविधाजनक बनाने के लिए नगर पंचायत कमालगंज द्वारा इंटरलॉकिंग रोड का निर्माण भी करा दिया गया है, जिससे पूरे मामले में स्थानीय प्रशासन और नगर निकाय की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
मामले में एक अहम तथ्य यह भी है कि सिविल जज (सीनियर डिवीजन) प्रीति माला चतुर्वेदी द्वारा 10 तारीख को स्पष्ट आदेश जारी किया गया था कि उक्त भूमि विवादित है और न्यायालय के अंतिम निर्णय तक न तो किसी प्रकार का निर्माण किया जाएगा और न ही भूमि का विक्रय होगा। इसके बावजूद मौके पर न सिर्फ प्लाटिंग जारी है, बल्कि बिना किसी वैधानिक प्रक्रिया के भोले-भाले लोगों को प्लाट बेचे जा रहे हैं।
यही नहीं, पास की ही गाटा संख्या 236 भी विवादित बताई जा रही है, जिस पर भी न्यायालय का स्थगन आदेश पहले से प्रभावी है। इसके बाद भी दोनों गाटों में बिना विधिवत नाप-जोख, बिना भूमि उपयोग परिवर्तन (कृषि से आवासीय) की अनुमति और बिना सक्षम प्राधिकरण से लेआउट स्वीकृति के धड़ल्ले से प्लाट काटे जा रहे हैं।
नियमों के अनुसार किसी भी कृषि भूमि पर प्लाटिंग करने से पहले राजस्व विभाग से भूमि की पैमाइश, सक्षम प्राधिकारी से नवाईयात/भू-उपयोग परिवर्तन, स्थानीय निकाय या विकास प्राधिकरण से लेआउट प्लान की स्वीकृति, सड़क, नाली, जल निकासी जैसी बुनियादी सुविधाओं की वैधानिक मंजूरी तथा पंजीकरण से पूर्व सभी कानूनी औपचारिकताओं का पूरा होना अनिवार्य है। इसके अतिरिक्त, न्यायालय द्वारा विवादित घोषित भूमि पर किसी भी प्रकार का विक्रय या निर्माण अदालत की अवमानना की श्रेणी में आता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने कार्रवाई नहीं की, तो भविष्य में प्लाट खरीदने वाले लोग बड़े कानूनी पचड़ों में फंस सकते हैं। ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने जिलाधिकारी और संबंधित उच्चाधिकारियों से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो और अवैध प्लाटिंग पर तत्काल रोक लगाई जाए, ताकि कानून का मजाक बनने से रोका जा सके।






