बांदा। जिला कारागार से माफिया रवि काना की संदिग्ध रिहाई के मामले ने जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जेल अधीक्षक अनिल कुमार गौतम और डिप्टी जेलर निर्भय सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
B-वारंट के बावजूद कैसे हुई रिहाई
जांच में सामने आया है कि माफिया रवि काना के खिलाफ अन्य मामले में B-वारंट जारी था। इसके बावजूद उसे जेल से रिहा कर दिया गया, जो जेल नियमों का सीधा उल्लंघन है। इसी लापरवाही और संभावित मिलीभगत को आधार बनाकर शासन ने सख्त कदम उठाया।
इस पूरे प्रकरण में केवल अधिकारी ही नहीं, बल्कि संबंधित जेल कर्मचारियों पर भी पहले मुकदमा दर्ज किया जा चुका है। आरोप है कि कागजी प्रक्रिया में जानबूझकर लापरवाही बरती गई या नियमों को नजरअंदाज किया गया, जिससे रवि काना की रिहाई संभव हो सकी।
प्रशासनिक महकमे में हड़कंप
घटना के बाद जेल प्रशासन और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। उच्च स्तर से पूरे मामले की विभागीय और कानूनी जांच कराई जा रही है। यह भी जांच की जा रही है कि,क्या रिहाई में किसी तरह का दबाव था,क्या आर्थिक या आपराधिक सांठगांठ की भूमिका रही
जेल रिकॉर्ड और दस्तावेजों में किस स्तर पर चूक हुई।
इस कार्रवाई को शासन की जीरो टॉलरेंस नीति के रूप में देखा जा रहा है। स्पष्ट संदेश दिया गया है कि माफिया या संगठित अपराध से जुड़े मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
यह पूरा मामला बांदा जिला कारागार से जुड़ा है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद और भी जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई हो सकती है।
यह प्रकरण न सिर्फ जेल व्यवस्था की खामियों को उजागर करता है, बल्कि माफिया नेटवर्क के खिलाफ प्रशासन की सख्ती की अग्निपरीक्षा भी बन गया है।






