एंटीबायोटिक के गलत इस्तेमाल से बढ़ता खतरा, मानवता के लिए गंभीर चेतावनी
नई दिल्ली। एंटीबायोटिक दवाओं का लापरवाह और मनमाना उपयोग आज एक ऐसी खामोश महामारी को जन्म दे चुका है, जो धीरे-धीरे आम इलाज को भी बेअसर बना रही है। इसे एंटीमाइक्रोबियल रेसिस्टेंस (एएमआर) कहा जाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर इस पर समय रहते काबू नहीं पाया गया तो आने वाले वर्षों में साधारण संक्रमण भी जानलेवा साबित हो सकते हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि देश में बड़ी संख्या में लोग बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक खरीदकर सेवन कर लेते हैं। अधूरी खुराक, बार-बार दवा बदलना और जरूरत न होने पर एंटीबायोटिक लेना बैक्टीरिया को और मजबूत बना देता है। नतीजा यह होता है कि वही दवाएं, जो पहले असरदार थीं, धीरे-धीरे बेकार हो जाती हैं।

वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन पहले ही एएमआर को मानवता के लिए सबसे बड़े वैश्विक स्वास्थ्य खतरों में शामिल कर चुका है। डब्लूएचओ के अनुसार, अगर मौजूदा स्थिति बनी रही तो भविष्य में सर्जरी, डिलीवरी और सामान्य इलाज भी जोखिम भरे हो जाएंगे।
जागरूकता अभियान की शुरुआत
इस गंभीर खतरे को देखते हुए दैनिक जागरण और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आई एम ए) ने मिलकर एएमआर के खिलाफ एक विशेष जागरूकता अभियान शुरू करने की घोषणा की है। इस अभियान के तहत एएमआर के कारणों,इसके स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव,
और इससे बचाव के उपायों
पर समाज को जागरूक किया जाएगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि एएमआर से लड़ने का सबसे बड़ा हथियार जागरूकता और जिम्मेदारी है।
एंटीबायोटिक केवल डॉक्टर की सलाह पर लें, पूरी खुराक जरूर पूरी करें, हर बुखार या संक्रमण में एंटीबायोटिक की मांग न करें।
एएमआर कोई दूर का खतरा नहीं, बल्कि हमारी लापरवाही से पैदा हुई समस्या है। अगर आज सही कदम नहीं उठाए गए, तो कल दवाइयों के होते हुए भी इलाज नामुमकिन हो सकता है।याद रखें एंटीबायोटिक का गलत इस्तेमाल आज नहीं रोका गया, तो कल दवाएं हमारा साथ छोड़ देंगी।

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