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Tuesday, January 13, 2026

नेपाल सीमा से सटे जिलों के आदिवासियों तक पहुंचेगी

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 केजीएमयू-पीजीआई की चिकित्सा टीम, गांवों में लगेंगे चार दिवसीय स्वास्थ्य शिविर

लखनऊ| प्रदेश के नेपाल सीमा से सटे जिलों में रहने वाले आदिवासी और दलित वर्ग के लोगों को अब इलाज के लिए झोलाछाप डॉक्टरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। उनके उपचार के लिए राजधानी लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू), डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान, संजय गांधी पीजीआई और कल्याण सिंह कैंसर संस्थान के विशेषज्ञ चिकित्सक सीधे गांवों तक पहुंचेंगे। जिन मरीजों में सर्जरी या विशेष उपचार की जरूरत होगी, उन्हें लखनऊ लाकर इलाज कराया जाएगा। इसकी तैयारियां शुरू हो चुकी हैं और रविवार को संबंधित जिलों में बैठक कर शिविरों के स्थान तय किए गए।

दरअसल, नेपाल सीमा से लगे पीलीभीत, बहराइच, बलरामपुर, श्रावस्ती, सिद्धार्थनगर, महराजगंज और लखीमपुर खीरी जिलों में जागरूकता की कमी और आर्थिक तंगी के कारण आदिवासी व दलित वर्ग के लोग समय पर अस्पतालों तक नहीं पहुंच पाते। नतीजतन वे संक्रामक और गंभीर बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं। इस समस्या को देखते हुए श्री गुरु गोरखनाथ सेवा न्यास ने बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की पहल की है।

विभिन्न सामाजिक और चिकित्सा संगठनों के सहयोग से इन सात जिलों में 5 से 8 फरवरी तक चार दिवसीय स्वास्थ्य शिविर लगाए जाएंगे। शिविरों में केजीएमयू, संजय गांधी पीजीआई, लोहिया संस्थान और कल्याण सिंह कैंसर संस्थान सहित प्रदेश के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों के चिकित्सा शिक्षक और रेजीडेंट डॉक्टर मरीजों की जांच करेंगे, उन्हें निशुल्क दवाएं उपलब्ध कराएंगे और जरूरत पड़ने पर सर्जरी के लिए संबंधित मेडिकल कॉलेजों में रेफर करेंगे।

श्री गुरु गोरखनाथ सेवा न्यास के सचिव डॉ. भूपेंद्र सिंह ने बताया कि आदिवासी क्षेत्रों से आने वाले मरीज अक्सर तब ओपीडी तक पहुंचते हैं, जब बीमारी गंभीर रूप ले चुकी होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए संगठन से जुड़े चिकित्सा संस्थानों की फैकल्टी और रेजीडेंट्स ने निर्णय लिया कि वे स्वयं टीम बनाकर गांवों में जाकर मरीजों की पहचान करेंगे और समय रहते उनका इलाज सुनिश्चित करेंगे। उन्होंने बताया कि यह शिविर पिछले तीन वर्षों से लगातार आयोजित किए जा रहे हैं, जिससे न केवल मरीजों को लाभ मिल रहा है बल्कि विशेषज्ञ डॉक्टरों को भी ग्रामीण और अभावग्रस्त मरीजों की जांच रिपोर्ट के आधार पर कैंसर, चर्मरोग, हीमोग्लोबिन और जेनेटिक्स से जुड़ी बीमारियों पर रिसर्च का अवसर मिल रहा है।

नेशनल मेडिकोज ऑर्गनाइजेशन के महामंत्री शिवम मिश्रा ने बताया कि इस अभियान के तहत करीब दो हजार गांवों में स्वास्थ्य शिविर लगाए जाएंगे और अंतिम दिन प्रत्येक जिला या तहसील मुख्यालय पर मेगा कैंप आयोजित होगा, ताकि अधिक से अधिक लोग इसका लाभ उठा सकें। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ वर्चुअल माध्यम से करेंगे। वहीं उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह, समाज कल्याण राज्यमंत्री असीम अरुण, सहकारिता राज्यमंत्री जेपीएस राठौर सहित संबंधित जिलों के प्रभारी मंत्री अलग-अलग जिलों में पहुंचकर शिविरों का उद्घाटन करेंगे। इस अभियान में सेवा भारती, एकल अभियान, सीमा जागरण मंच, वनवासी कल्याण आश्रम और आरोग्य भारती जैसे संगठन भी सक्रिय सहयोग करेंगे।

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