लखनऊ। राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) ने अंसल को दिवालिया घोषित किए जाने के राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) के आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। करीब 10 महीने तक चली सुनवाई के बाद आए इस फैसले से लगभग 5000 आवंटियों और निवेशकों को फिलहाल कोई राहत नहीं मिल सकी है। हालांकि एनसीएलएटी ने आवंटियों और निवेशकों को एक और अवसर देते हुए एनसीएलटी के समक्ष अपना पक्ष रखने की अनुमति दी है।
एनसीएलएटी के आदेश के तहत अब आवंटी और निवेशक 15 से 20 दिन के भीतर एनसीएलटी में अपना पक्ष रख सकेंगे। अपीलीय न्यायाधिकरण ने एनसीएलटी को निर्देश दिया है कि वह सभी पक्षों की दोबारा सुनवाई करे। उल्लेखनीय है कि अंसल दिवालिया मामले में कई महीनों तक सुनवाई टलती रही थी। अंततः 17 दिसंबर को एनसीएलएटी में सुनवाई पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित कर लिया गया था, जिस पर अब आदेश जारी हुआ है।
आवंटी और निवेशक गगन टंडन ने बताया कि एनसीएलएटी के फैसले से आवंटियों को एक और मौका मिला है, ताकि वे एनसीएलटी के सामने अपनी बात रख सकें। उन्होंने कहा कि अब दो सप्ताह के भीतर आवंटी एनसीएलटी में अपना पक्ष मजबूती से प्रस्तुत करेंगे। गगन टंडन के अनुसार, अपीलीय न्यायाधिकरण ने मुख्य रूप से यह परखा कि निचली अदालत के आदेश में कोई कानूनी खामी तो नहीं है।
गौरतलब है कि एनसीएलटी ने अंसल को आईएलएफएस के करीब 83 करोड़ रुपये बकाया न चुकाने के कारण दिवालिया घोषित किया था। एनसीएलएटी ने इस आदेश पर रोक नहीं लगाई, लेकिन मामले को कुछ निर्देशों के साथ वापस एनसीएलटी के पास भेज दिया है। इन निर्देशों में हाईटेक टाउनशिप से जुड़े नियमों की समीक्षा करने को कहा गया है, ताकि आवंटियों और निवेशकों के हितों की रक्षा की जा सके। अब सभी की नजरें एनसीएलटी में होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां से आवंटियों को राहत मिलने या न मिलने का फैसला होगा।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here