गंगा घाटों पर गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर लग सकता है कड़ा प्रतिबंध

हरिद्वार| उत्तराखंड सरकार हरिद्वार और ऋषिकेश को पवित्र सनातन नगरी घोषित करने पर गंभीरता से विचार कर रही है। इसके तहत गंगा नदी के प्रमुख घाटों पर गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने की संभावना जताई जा रही है। यह कदम राज्य सरकार द्वारा स्थानीय धार्मिक संस्थाओं और समाजिक संगठनों की मांग के अनुरूप उठाए जाने की संभावना है।
जानकारी के अनुसार, 1953 की नगरपालिका उपविधि में पहले ही हर की पैड़ी सहित कुछ महत्वपूर्ण घाटों पर गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक और 10 रुपये तक का जुर्माना लगाने का प्रावधान है। इसे आधार मानते हुए श्री गंगा सभा और अन्य धार्मिक संगठनों ने सरकार से मांग की है कि यह प्रतिबंध हरिद्वार और ऋषिकेश के सभी 105 गंगा घाटों पर नए सिरे से लागू किया जाए, ताकि घाटों और धार्मिक स्थलों की धार्मिक मर्यादा और पवित्रता बनी रहे।
नगरपालिका उपविधि में स्पष्ट उल्लेख है कि प्रांतीय म्युनिसिपैलिटी एक्ट, 1916 की धारा 299(1) के अंतर्गत नियम तोड़ने पर दस रुपये तक का अर्थदंड लगाया जा सकता है। इसके अलावा, यदि नियम का उल्लंघन बार-बार होता रहा तो पहली बार के बाद प्रतिदिन पांच रुपये तक का अतिरिक्त जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
स्थानीय धार्मिक संगठनों का कहना है कि यह कदम केवल धार्मिक भावना की रक्षा के लिए नहीं, बल्कि सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक अनुशासन को बनाए रखने के लिए भी आवश्यक है। इसके साथ ही उन्होंने घाटों के आसपास मांस और शराब की बिक्री पर भी चिंता व्यक्त की है, ताकि गंगा के तटों और धार्मिक स्थलों की पवित्रता और श्रद्धा कायम रहे।
सरकारी अधिकारी अब इस प्रस्ताव के कानूनी, सामाजिक और धार्मिक पहलुओं का विस्तृत अध्ययन कर रहे हैं। माना जा रहा है कि यदि यह नियम लागू हुआ तो यह न केवल धार्मिक आस्था और सामाजिक व्यवस्था की रक्षा करेगा, बल्कि हरिद्वार और ऋषिकेश में आने वाले लाखों तीर्थयात्रियों के लिए सुरक्षित, सुव्यवस्थित और शांतिपूर्ण वातावरण भी सुनिश्चित करेगा।
यह कदम उत्तराखंड की धार्मिक नगरीयों के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व को और भी मजबूती देगा और गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं की आस्था की गहन सुरक्षा सुनिश्चित करेगा।

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