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Friday, February 27, 2026

GPS युक्त वाहनों से यूपी में खाद्यान्न उठान में बढ़ी पारदर्शिता

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– 5 हजार से अधिक वाहनों से गोदाम से दुकान तक मजबूत निगरानी चेन
– डोर स्टेप डिलीवरी से चोरी और कालाबाजारी पर निर्णायक प्रहार

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में जनवितरण प्रणाली को चोरी, लीकेज और गड़बड़ी से मुक्त करने की दिशा में GPS आधारित ट्रैकिंग सिस्टम (tracking system) एक गेम चेंजर साबित हो रहा है। प्रदेश में 5 हजार से अधिक जीपीएस युक्त वाहनों (GPS-enabled vehicles) के माध्यम से अब खाद्यान्न की आवाजाही गोदाम से लेकर उचित दर दुकानों तक पूरी तरह डिजिटल निगरानी में हो रही है। सिंगल स्टेज डोर स्टेप डिलीवरी व्यवस्था और रियल टाइम ट्रैकिंग के चलते खाद्यान्न की एक-एक बोरी पर नजर रखी जा रही है, जिससे कालाबाजारी और चोरी पर प्रभावी रोक लगी है।

डिजिटल निगरानी से लगभग खत्म हुई कालाबाजारी

प्रदेश में खाद्यान्न उठान कार्यों में लगे 5000 से अधिक वाहनों में जीपीएस डिवाइस इंस्टॉल की जा चुकी है। इसके माध्यम से भारतीय खाद्य निगम (FCI) के डिपो से उचित दर दुकानों तक पूरे परिवहन की रियल टाइम मॉनिटरिंग हो रही है। वाहन कहां से चला, किस रास्ते से गुजरा, कहां रुका और तय समय में गंतव्य तक पहुंचा या नहीं—हर जानकारी कंट्रोल सिस्टम में दर्ज होती है। इसका सीधा असर यह हुआ है कि रास्ते में होने वाली हेराफेरी, डायवर्जन और कालाबाजारी लगभग समाप्त हो गई है।

  1. खरीफ विपणन सत्र 2025–26 में धान खरीद के दौरान भी जीपीएस ट्रैकिंग को अनिवार्य किया गया है।
  2. क्रय केंद्रों से राइस मिलों तक धान परिवहन में 3773 वाहन जीपीएस से जोड़े गए हैं।
  3. मोटे अनाज—मक्का, ज्वार और बाजरा—के परिवहन के लिए 1428 वाहन जीपीएस युक्त किए गए हैं।
  4. इस व्यवस्था से सरकारी खरीद से लेकर भंडारण डिपो तक पूरी सप्लाई चेन पारदर्शी और जवाबदेह हो गई है।
  5. सिंगल स्टेज डोर स्टेप डिलीवरी से सिस्टम हुआ और मजबूत
  6. प्रदेश में ब्लॉक गोदामों की पुरानी व्यवस्था समाप्त कर सिंगल स्टेज डोर स्टेप डिलीवरी मॉडल लागू किया गया है।
  7. इसके तहत अब एफसीआई डिपो से सीधे उचित दर विक्रेताओं की दुकानों तक खाद्यान्न पहुंचाया जा रहा है।
  8. यह व्यवस्था ई-टेंडर के माध्यम से नियुक्त ठेकेदारों से कराई जा रही है, जिससे मानवीय हस्तक्षेप कम हुआ है और
  9. जवाबदेही तय हुई है। जीपीएस ट्रैकिंग के साथ यह मॉडल जनवितरण प्रणाली की रीढ़ बन गया है।
  10. वित्तीय वर्ष 2025–26 में अब तक चयनित लाभार्थियों के लिए
  11. 8.03 लाख मीट्रिक टन खाद्यान्न व मोटे अनाज का आवंटन
  12. 36,850.35 मीट्रिक टन चीनी (अंत्योदय लाभार्थियों हेतु) किया जा चुका है।

जीपीएस आधारित निगरानी से यह सुनिश्चित हो रहा है कि खाद्यान्न बिना चोरी, बिना कटौती और सही समय पर लाभार्थियों तक पहुंचे। योगी आदित्यनाथ सरकार का साफ संदेश है—सरकारी खाद्यान्न अब रास्ते में गायब नहीं होगा। तकनीक, सख्त निगरानी और जवाबदेही के जरिए यह सिद्ध हो गया है कि मजबूत इच्छाशक्ति और स्मार्ट सिस्टम से खाद्यान्न चोरी जैसे पुराने संकट को भी जड़ से समाप्त किया जा सकता है।

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