– होली पहले और देरी से मनाई जाएगी दिवाली
वाराणसी: हिंदी पंचांग (hindi almanac) के अनुसार वर्ष 2026 एक विशेष संयोग लेकर आ रहा है। इस वर्ष अधिकमास के कारण आठ साल बाद दो ज्येष्ठ माह (Jyeshtha months) पड़ेंगे। अधिकमास होने से साल 13 महीनों का होगा, जिसका सीधा असर व्रत-त्योहारों की तिथियों पर पड़ेगा। इसी कारण इस वर्ष होली पिछले साल की तुलना में 10 दिन पहले और दिवाली 17 दिन बाद मनाई जाएगी।
ज्योतिषीय गणना के अनुसार अधिकमास को पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। यह चंद्र और सौर वर्ष के बीच बनने वाले अंतर को संतुलित करने के लिए हर तीन साल में जोड़ा जाता है। वर्ष 2026 में अधिकमास 17 मई से 15 जून तक रहेगा। इस कारण साल के पहले छह महीनों में त्योहार करीब 10 दिन पहले पड़ेंगे, जबकि अगले छह महीनों में 16 से 19 दिन की देरी से मनाए जाएंगे। होली चार मार्च को और दीपावली आठ नवंबर को होगी।
श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के अध्यक्ष प्रो. नागेंद्र पांडेय के अनुसार हिंदू पर्व चंद्रमा की स्थिति पर आधारित होते हैं, इसलिए अधिकमास का प्रभाव पूरे पंचांग पर पड़ता है। इस वर्ष मांगलिक कार्यों की शुरुआत चार फरवरी से होगी और इसी दिन से विवाह के लग्न भी आरंभ हो जाएंगे। हालांकि अधिकमास के दौरान कोई भी शुभ या मांगलिक कार्य नहीं किए जाते।
त्योहारों की बात करें तो जनवरी में मकर संक्रांति 14 जनवरी को ही रहेगी, जबकि फरवरी में महाशिवरात्रि 15 फरवरी को, मार्च में चार को होली, अप्रैल में 20 को अक्षय तृतीया, मई में गंगा दशहरा 26 को और नवंबर में आठ को दीपावली मनाई जाएगी। इसके अलावा नवरात्र, रामनवमी, जन्माष्टमी, दशहरा और अन्य प्रमुख पर्वों की तिथियों में भी बदलाव देखने को मिलेगा।
ज्योतिष के अनुसार वर्ष 2026 का राजा गुरु बृहस्पति और मंत्री मंगल होंगे। यह रौद्र नामक संवत्सर होगा। गुरु के राजा होने से वर्ष में उतार-चढ़ाव के बावजूद संतुलन और समन्वय बना रहेगा। अधिकमास के दौरान दान, जप, तप, तीर्थ स्नान और भगवान शिव का अभिषेक विशेष फलदायी माना गया है। कुल मिलाकर वर्ष 2026 धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण रहने वाला है।


