फर्रुखाबाद। जनपद में साइबर अपराधियों का दुस्साहस लगातार बढ़ता जा रहा है। अब ठगों ने जिले के सर्वोच्च प्रशासनिक अधिकारी आशुतोष द्विवेदी, जिलाधिकारी फर्रुखाबाद, के नाम और फोटो का दुरुपयोग करते हुए फर्जी फेसबुक आईडी बना ली और उसी के जरिए लोगों से पैसे मांगने का प्रयास किया।
ताजा मामला कादरी गेट थाना क्षेत्र के गांव चांदपुर निवासी पत्रकार हिरदेश कुमार से जुड़ा है। पत्रकार के फेसबुक अकाउंट पर जिलाधिकारी के नाम और तस्वीर से बनी फर्जी आईडी से पहले फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजी गई और बाद में मैसेज के जरिए बातचीत शुरू की गई।
प्राप्त जानकारी के अनुसार शुरुआती बातचीत पूरी तरह सामान्य और भरोसा दिलाने वाली थी, जिससे सामने वाला व्यक्ति खुद को किसी उच्च अधिकारी के रूप में स्थापित करता रहा। कुछ देर बाद ठग ने अपने एक “दोस्त” का हवाला देते हुए किसी सामान को बिकवाने की बात कही और ₹95,000 की मांग कर दी।
बातचीत के लहजे और संदिग्ध तथ्यों से पत्रकार हिरदेश कुमार को शक हुआ। उन्होंने फेसबुक प्रोफाइल की गहराई से जांच की, जिसमें स्पष्ट हो गया कि यह आईडी पूरी तरह फर्जी है और इसका उद्देश्य केवल ठगी करना है। समय रहते सतर्कता बरतने से एक बड़ी आर्थिक ठगी होने से बच गई।
पुलिस और प्रशासन को दी सूचना
पत्रकार हिरदेश कुमार ने जिम्मेदार नागरिक की भूमिका निभाते हुए इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी सर्विलांस प्लान और पुलिस अधीक्षक के आवास पर जाकर अधिकारियों को दी। उन्होंने बताया कि जल्द ही इस फर्जी फेसबुक आईडी और अज्ञात साइबर अपराधियों के खिलाफ विधिवत मुकदमा दर्ज कराया जाएगा, ताकि दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो सके।
समाज के लिए गंभीर चेतावनी
यह मामला केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे समाज के लिए गंभीर चेतावनी है। साइबर अपराधी अब जिलाधिकारी, वरिष्ठ अधिकारियों और प्रतिष्ठित व्यक्तियों की पहचान का दुरुपयोग कर आम नागरिकों को जाल में फंसाने की कोशिश कर रहे हैं। यदि कोई व्यक्ति बिना पुष्टि के पैसे भेज देता, तो वह सीधे साइबर ठगी का शिकार हो सकता था।
प्रशासनिक अधिकारियों के नाम से फर्जी सोशल मीडिया आईडी बनाकर पैसे मांगना न केवल कानूनन गंभीर अपराध है, बल्कि इससे जनता के विश्वास और प्रशासन की छवि को भी नुकसान पहुंचता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई और डिजिटल निगरानी बेहद जरूरी है।
प्रशासन और साइबर विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर किसी भी अनजान या संदिग्ध संदेश से सतर्क रहें। किसी भी तरह की पैसे की मांग होने पर तुरंत पुष्टि करें, और ऐसे मामलों की जानकारी तत्काल पुलिस और साइबर सेल को दें।
फर्रुखाबाद का यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि साइबर अपराधी लगातार नई-नई तरकीबें अपना रहे हैं। ऐसे में जागरूकता और त्वरित कार्रवाई ही इन अपराधों से बचाव का सबसे बड़ा हथियार है।

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