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Monday, February 16, 2026

रामपुर में पुलिस ने अंतरराज्यीय साइबर धोखाधड़ी गिरोह का किया भंडाफोड़, दिल्ली में छह गिरफ्तार

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रामपुर: यूपी के रामपुर (Rampur) में सिविल लाइंस थाना (Civil Lines Police Station) क्षेत्र में साइबर अपराध के खिलाफ चलाए गए अभियान में एक टीम ने दिल्ली (Delhi) के एक व्यावसायिक भवन से छह आरोपियों को गिरफ्तार (arrested) किया। पुलिस की यह कार्रवाई तकनीकी साक्ष्यों, मोबाइल फोन, आईएमईआई नंबरों के विश्लेषण और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के प्रावधानों के आधार पर की गई। पुलिस ने गुरुवार को बताया कि यह गिरोह एटीएम कार्ड, चेकबुक, बैंक पासबुक और यूपीआई खातों का दुरुपयोग करके विभिन्न राज्यों के लोगों को ठगता था।

आरोपी अंशकालिक नौकरियों, जुए के अवसरों, फिशिंग लिंक और सोशल मीडिया तकनीकों का उपयोग करके ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से पीड़ितों को निशाना बनाते थे। पीड़ितों द्वारा पैसे ट्रांसफर करने के बाद, गिरोह तुरंत उनके बैंक खातों को खाली कर देता था। ऑपरेशन के दौरान, पुलिस ने आरोपियों से 4 लैपटॉप, 17 मोबाइल फोन, एक वाई-फाई राउटर, 270 एटीएम कार्ड, 222 बैंक पासबुक और 47 चेकबुक बरामद कीं। अब तक इस मामले से जुड़े 35 बैंक खातों में लगभग 12 लाख रुपये फ्रीज किए जा चुके हैं, जबकि अन्य संदिग्ध खातों का विवरण बैंकों से प्राप्त किया जा रहा है।

पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और पंजाब के रहने वाले हैं। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि गिरोह का नेटवर्क कई राज्यों में फैला हुआ था। पूछताछ के बाद और भी खुलासे होने की उम्मीद है। यह ऑपरेशन साइबर सेल और सिविल लाइंस पुलिस स्टेशन की टीम ने संयुक्त रूप से चलाया। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनुराग सिंह ने बताया कि गिरोह नोएडा सेक्टर 143 से एक अवैध साइबर एक्सचेंज चला रहा था, जहां वे कई फर्जी खातों के जरिए धोखाधड़ी का पैसा ट्रांसफर करते थे।

उन्होंने कहा, वे अलग-अलग असली खातों के जरिए पैसा ट्रांसफर करते थे, फर्जी नंबरों का इस्तेमाल करके उन्हें संचालित करते थे और ऑनलाइन सट्टेबाजी, जुआ और साइबर धोखाधड़ी से संबंधित धन को डायवर्ट करते थे। इसके बदले में वे कमीशन कमाते थे और साइबर अपराधियों के साथ लगातार संपर्क में रहते थे।

एएसपी ने बताया कि इस मामले में कुल छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है और बड़ी मात्रा में डिजिटल उपकरण, एटीएम कार्ड, पासबुक और मोबाइल फोन जब्त किए गए हैं। जांच जारी है और पुलिस को साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क से जुड़े और भी लोगों और कड़ियों का पता चलने की उम्मीद है।

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