लखनऊ| ओबरा-अनपरा क्षेत्र में प्रस्तावित नई बिजली परियोजनाओं को लेकर संघर्ष समिति ने सरकार के सामने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। समिति ने इन परियोजनाओं के लिए बनाए गए ज्वाइंट वेंचर को समाप्त करने की मांग करते हुए कहा है कि मौजूदा व्यवस्था से न तो परियोजनाएं समय पर पूरी हो पा रही हैं और न ही क्षेत्र का अपेक्षित विकास हो रहा है। संघर्ष समिति का कहना है कि ज्वाइंट वेंचर के कारण निर्णय प्रक्रिया जटिल हो गई है, जिससे काम की गति प्रभावित हो रही है।

संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि ओबरा और अनपरा की दोनों नई बिजली परियोजनाओं का कार्य उत्तर प्रदेश पावर जनरेशन कॉरपोरेशन लिमिटेड (उत्पादन निगम) को सीधे सौंपा जाए। समिति का दावा है कि यदि उत्पादन निगम को अकेले यह काम दिया जाता है, तो प्रदेश को बिजली 35 से 40 पैसे प्रति यूनिट तक सस्ती मिल सकती है, जिससे उपभोक्ताओं को भी सीधा लाभ होगा।

समिति ने यह भी कहा कि जिन परियोजनाओं को पांच साल में पूरा किया जाना था, उनमें अब ढाई साल से अधिक का विलंब हो चुका है। इस देरी के कारण परियोजनाओं की लागत सैकड़ों करोड़ रुपये बढ़ रही है, जो प्रदेश के आर्थिक हितों के विपरीत है। बढ़ती लागत का बोझ अंततः प्रदेश सरकार और बिजली उपभोक्ताओं पर ही पड़ता है।

संघर्ष समिति ने मध्य प्रदेश सरकार का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां अमरकंटक बिजली घर में ज्वाइंट वेंचर के तहत दो साल तक काम शुरू नहीं होने पर सरकार ने ज्वाइंट वेंचर को समाप्त कर नई स्थापित होने वाली इकाई का कार्य सीधे प्रदेश के उत्पादन निगम को सौंपने का निर्णय लिया था। समिति का कहना है कि उत्तर प्रदेश सरकार को भी इसी तरह ठोस फैसला लेकर ओबरा-अनपरा परियोजनाओं को गति देनी चाहिए।

संघर्ष समिति ने सरकार से इस पूरे मामले पर पुनर्विचार करने का आग्रह करते हुए कहा है कि समयबद्ध निर्णय नहीं लिया गया तो न केवल क्षेत्र का विकास प्रभावित होगा, बल्कि प्रदेश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में भी कठिनाई बढ़ सकती है।

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